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स्मृति ईरानी की वापसी: चुनाव से पहले BJP को क्यों याद आईं 'जायंट किलर'?

Published: Mon, 17 Aug 2026 08:05 PM (GMT+05:30)

बीजेपी ने स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त किया है, जो 2024 की हार के बाद उनकी केंद्रीय संगठन में वापसी है।

बीजेपी ने स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव किया नियुक्त (फाइल फोटो)

बीजेपी ने स्मृति ईरानी को राष्ट्रीय महासचिव किया नियुक्त (फाइल फोटो)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। बीजेपी ने सोमवार को अपनी नई राष्ट्रीय टीम का एलान किया है। इस लिस्ट में चर्चित और अहम नाम पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का है। लोकप्रिय टीवी एक्टर से लेकर कद्दावर नेता बनने तक का सफर तय करने वाली स्मृति ईरानी को बीजेपी ने राष्ट्रीय महासचिव बनाया है।

2024 लोकसभा चुनाव में अमेठी से मिली हार के बाद उन्हें केंद्रीय संगठन से बाहर रखा गया था, लेकिन उनकी यह वापसी केवल एक सामान्य सांगठनिक फेरबदल नहीं, बल्कि चुनाव से पहले की रणनीति का हिस्सा है।

उत्तर प्रदेश की राजनीति, स्मृति का आधार

स्मृति ईरानी का राजनीतिक वजूद और पहचान मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश से जुड़ी रही है। साल 2014 में उन्होंने पहली बार अमेठी लोकसभा सीट से चुनाव लड़ा था। यह सीट कांग्रेस की पारंपरिक सीट मानी जाती थी। 2014 का चुनाव स्मृति ईरानी हार गईं, लेकिन इसके बाद उन्होंने वहां जमीनी स्तर पर काम करना जारी रखा।

उन्होंने गांवों के लगातार दौरे, बूथ स्थर के कार्यकर्ताओ को एकजुट करने और स्थानीय कैडर को मजबूत करने का काम किया। उनका 5 साल का यह निवेश 2019 के लोकसभा चुनाव में रंग लाया।

राहुल गांधी को दी पटकनी

2019 के लोकसभा चुनाव में स्मृति ईरानी ने कांग्रेस के तत्कालीन अध्यक्ष राहुल गांधी को 55,120 वोटों के अंतर से हराकर इतिहास रचा था। राहुल गांधी को 4,13,394 वोट मिले थे, जबकि स्मृति ईरानी को 4,68,514 वोट प्राप्त हुए थे।

इस ऐतिहासिक जीत ने दशकों पुराने गांधी परिवार के गढ़ को ध्वस्त कर दिया और उन्हें भारतीय राजनीति में जायंट किलर के रूप में स्थापित कर दिया। हालांकि, 2024 के चुनाव में उन्हें कांग्रेस उम्मीदवार किशोरी लाल शर्मा के हाथों हार का सामना करना पड़ा।

अब राष्ट्रीय महासचिव के रूप में नई भूमिका

अब राष्ट्रीय महासचिव बनाकर पार्टी ने स्मृति ईरानी की वापसी कराई है। हालांकि, इस वापसी के बाद उनके कंधों पर बहुत बड़ी सांगठनिक जिम्मेदारियां होंगी। उनका मुख्य काम-

  • राज्य इकाइयों (State Units) के साथ बेहतर तालमेल बनाना।
  • चुनाव के दौरान सही उम्मीदवारों के चयन की प्रक्रिया में भाग लेना।
  • पार्टी के भीतर के गुटबाजी और अंदरूनी मतभेदों को सुलझाना।
  • बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं और आम जनता को लामबंद करना।

हाई-विजिबिलिटी पॉलिटिकल कैंपेनर

एक तरफ जहां पार्टी में सुनील बंसल जैसे रणनीतिकार पर्दे के पीछे रहकर काम करने के लिए जाने जाते हैं, वहीं स्मृति ईरानी को हाई-विजिबिलिटी पॉलिटिकल कैंपेनर के रूप में जाना जाता है। स्मृति ईरानी एक प्रखर वक्ता हैं, जो जनसंवाद करने और विपक्षी हमलों का करारा जवाब देने में माहिर हैं।

उत्तर प्रदेश जैसे राज्य में, जहां चुनावी माहौल जातिगत समीकरणों के साथ-साथ तीखी बयानबाजी और प्रभावी मैसेजिंग से तय होता है, वहां स्मृति ईरानी का यह आक्रामक और विजिबल नेतृत्व पार्टी के बेहद काम आएगा।

महिला वोट बैंक साधने की कोशिश

स्मृति ईरानी की वापसी के पीछे एक बड़ा कारण बीजेपी का महिला मतदाताओं पर लगातार बढ़ता फोकस भी हैं। पिछले एक दशक में महिलाएं बीजेपी के सबसे भरोसेमंद और साइलेंट वोटर के रूप में उभरकर सामने आईं हैं।

उज्ज्वला योजना, स्वच्छ भारत अभियान और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) जैसी योजनाओं के केंद्र में महिलाएं ही रही हैं।

स्मृति ईरानी महिला मतदाताओं के बीच एक जाना-पहचाना, विश्वसनीय और प्रभावशाली चेहरा हैं। ऐसे में विधानसभा चुनावों से ठीक पहले उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर आगे लाकर पार्टी महिलाओं को एक बार फिर से साधने और अपने पाले में मजबूत करने की पुरजोर कोशिश करेगी।