जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जाट आरक्षण की राजनीतिक व सामाजिक संवेदनशीलता को देखते हुए भाजपा हरियाणा के बजट सत्र से पहले ही संवैधानिक रास्ता ढूंढ लेना चाहती है। प्रदेश में अनुसूचित जाति का न होना इस रास्ते की तलाश में थोड़ी सहायक है।

हरियाणा में जाट को विशेष ओबीसी का दर्जा देकर या फिर उनके लिए अलग से एक वर्ग बनाकर तीन फीसद आरक्षण का खाका तो तैयार है, लेकिन बात इसने से बनती नहीं दिख रही है। जाट की जनसंख्या को देखते हुए और रास्ता निकाला जाएगा। समिति मंगलवार को भी बैठेगी।

जाट आरक्षण पर विचार के लिए केंद्रीय मंत्री वेंकैया नायडू की अध्यक्षता में गठित समिति ने सोमवार से ही बैठक शुरू कर दी। इस समिति में सतपाल मलिक, अविनाश राय खन्ना, महेश शर्मा और संजीव बालियान सदस्य है। भाजपा नेतृत्व चाहता है कि जाट आरक्षण न सिर्फ लागू हो बल्कि जल्द हो ताकि उत्तर प्रदेश चुनाव में जाने से पहले प्रतिबद्धता और विश्वसनीयता के मानक पर पार्टी उंचा कद पा सके।

सूत्र बताते हैं कि हरियाणा की सामाजिक स्थिति और आरक्षण के कोटे से ही रास्ता निकलेगा। जाट ओबीसी कोटा में शामिल किए जाने की मांग कर रहे हैं, लेकिन गैर जाटों के बीच पहले से ही शुरू हुई बयानबाजी का स्पष्ट संकेत है कि ऐसा हुआ तो आंदोलन और भी हिंसक हो सकता है।

राजनीतिक रूप से भी उसका खामियाजा भुगतना पड़ सकता है। राज्य में अनुसूचित जनजाति नहीं है और इसीलिए अनुसूचित जाति-जनजाति के खाते में से तीन फीसद का एक ऐसा स्थान बचता है जो जाट समुदाय को दिया जा सकता है। लेकिन गौरतलब है कि हरियाणा में जाट की जनसंख्या 26 फीसद है लिहाजा दूसरे कोटे से भी एक हिस्सा काटना पड़ सकता है। ध्यान रहे कि संवैधानिक दृष्टि से अधिकतम आरक्षण सीमा 50 फीसद तय है। जबकि ओबीसी कमिटि ने जाटों को पिछड़ा मानने से इनकार कर दिया था।

बताते हैं कि समिति की बैठक रोजाना होगी। राज्यों से भी सुझाव मांगे गए हैं और जाट प्रतिनिधियों से भी चर्चा होगी। कोशिश यह है कि मार्च के दूसरे सप्ताह तक केंद्र से खाका तैयार कर राज्य को भेज दिया जाए ताकि 17 मार्च को हरियाणा विधानसभा में विधेयक लाया जा सके।

Posted By: Gunateet Ojha

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