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भारत-म्यांमार में विद्रोहियों को ट्रेनिंग देने के आरोपी 6 यूक्रेनी नागरिकों को जमानत, NIA कोर्ट का बड़ा फैसला

Published: Thu, 24 Sep 2026 01:45 PM (IST)

दिल्ली की एक विशेष NIA अदालत ने छह यूक्रेनी नागरिकों को जमानत दे दी है, जिन्हें मार्च में भारत और ...और पढ़ें

भारत और म्यांमार में हथियारबंद विद्रोहियों को ट्रेनिंग देने के आरोपी 6 यूक्रेनी नागरिकों को जमानत।

भारत और म्यांमार में हथियारबंद विद्रोहियों को ट्रेनिंग देने के आरोपी 6 यूक्रेनी नागरिकों को जमानत।

HighLights

  1. दिल्ली NIA अदालत ने छह यूक्रेनी नागरिकों को जमानत दी।

  2. मार्च में जातीय विद्रोहियों के लिए प्रशिक्षण शिविर चलाने के आरोप में गिरफ्तार।

  3. 180 दिन में चार्जशीट न होने पर मिली 'डिफॉल्ट बेल'।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली की एक विशेष NIA अदालत ने बुधवार को छह यूक्रेनी नागरिकों को बड़ी राहत देते हुए जमानत दे दी है। इन सभी को इस साल मार्च में गिरफ्तार किया गया था।

आरोप था कि ये लोग भारत और म्यांमार में जातीय सशस्त्र विद्रोहियों के लिए एक ट्रेनिंग कैंप चला रहे थे। अदालत ने इन्हें 1-1 लाख रुपये के नकद मुचलके पर रिहा करने का आदेश दिया है।

विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय से जुड़ी राहत

अदालत ने इन सभी को 'इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट' के तहत दर्ज अपराधों से भी बरी कर दिया है। यह फैसला तब आया जब विदेशी क्षेत्रीय पंजीकरण कार्यालय (FRRO) ने 5.5 लाख रुपये प्रति व्यक्ति का जुर्माना लेकर इन मामलों का निपटारा कर दिया। बता दें कि अवैध रूप से देश में प्रवेश करने और वीजा नियमों के उल्लंघन से जुड़े ये अपराध एफआरआरओ के स्तर पर सुलझाए जाने योग्य होते हैं।

अब समझिए क्यों मिली जमानत?

विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने अमेरिकी सह-आरोपी मैथ्यू आरोन वैन डाइक की समानता के आधार पर इन्हें 'डिफॉल्ट बेल' दी है। इससे पहले अदालत ने 18 सितंबर को अमेरिकी आरोपी डाइक की जमानत याचिका मंजूर करते हुए एनआईए के विरोध को खारिज कर दिया था। अदालत ने कहा था कि भले ही जांच अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता कि आरोपी डिफॉल्ट बेल का हकदार नहीं है।

क्या होता है डिफॉल्ट बेल का नियम?

इस बात को ऐसे समझिए यूएपीए जैसे कड़े आतंकवाद विरोधी कानूनों के तहत, यदि जांच एजेंसी गिरफ्तारी के 180 दिनों के भीतर चार्जशीट दाखिल नहीं करती है, तो आरोपी को वैधानिक रूप से 'डिफॉल्ट बेल' पाने का अधिकार मिल जाता है। इसी आधार पर अदालत ने अन्य छह यूक्रेनी आरोपियों को भी जमानत के लिए आवेदन करने की अनुमति दी थी।


गौरतलब है कि इस महीने की शुरुआत में जांच एजेंसी (NIA) ने अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें शुरुआती एफआईआर में लगाए गए UAPA, 1967 के प्रावधानों को शामिल नहीं किया गया था। इस कानूनी राहत के बाद अब इन सभी यूक्रेनी नागरिकों के जेल से बाहर आने का रास्ता साफ हो गया है।