'फारस की खाड़ी में 6 भारतीय जहाज मौजूद', होर्मुज क्षेत्र में 4500 नाविकों की सुरक्षा पर सरकार ने जताई चिंता
अमेरिका-ईरान तनाव के चलते फारस की खाड़ी में भारतीय नाविकों और जहाजों की सुरक्षा भारत की प्रमुख चिंता है।

फारस की खाड़ी में 6 भारतीय कार्गो जहाज मौजूद हैं (फाइल फोटो)

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव की वजह से होर्मुज जलमार्ग को लेकर स्थिति साफ नहीं हो पा रही है। ऐसे में भारत की चिंता यहीं है कि फारस की खाड़ी के आस-पास इलाके में दर्जनों जहाजों पर तैनात हजारों भारतीय नाविक सुरक्षित रहे।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जयसवाल ने बताया है कि फारस की खाड़ी में भारत में पंजीकृत 6 कार्गो जहाज मौजूद हैं। ये सभी जहाज हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पश्चिम में हैं। मंत्रालय के अनुसार खाड़ी क्षेत्र में भारतीय नाविकों की कुल संख्या करीब 4500 है।
फारस की खाड़ी में 6 भारतीय कार्गो जहाज मौजूद
भारत के लिए कार्गो लेकर 6 विदेशी झंडे वाले जहाज भी उसी इलाके में हैं, जिन पर 163 भारतीय नाविक सवार हैं। शिपिंग मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही पर लगातार नजर रख रहा है।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री मार्गों में है। दुनिया के कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा यहीं से गुजरता है। भारत के लिए यह रास्ता और भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि खाड़ी से आने वाले कच्चे तेल, एलपीजी, एलएनजी और उर्वरक जैसे जरूरी माल का बड़ा हिस्सा इसी जलडमरूमध्य से निकलता है।
पश्चिम एशिया में जारी तनाव के कारण पिछले कई महीनों से वाणिज्यिक जहाजों पर हमलों और आवाजाही में रुकावट की खबरें आती रही हैं। इसी वजह से भारतीय जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता बनी हुई है।
मार्च, 2026 में इस क्षेत्र में संकट शुरू होने के बाद से अभी तक विभिन्न जहाजों पर हुए हमले में अभी तक 11 भारतीयों की मौत हो चुकी है। इस वजह से भारत सरकार लगातार नौवहन की आजादी की मांग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठा रही है।
क्षेत्र में लगभग 4500 भारतीय नाविक कार्यरत
सरकार का कहना है कि भारतीय मिशन और पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय क्षेत्र में तैनात जहाजों और नाविकों की स्थिति की नियमित निगरानी कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर सहायता देने की तैयारी भी बनी हुई है।
इससे पहले तनाव बढ़ने पर भारत ने होर्मुज़ से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की नई तैनाती सीमित करने संबंधी सलाह भी जारी की थी। साथ ही 24 घंटे कंट्रोल रूम, जहाज-नाविक डेटाबेस और नियमित स्थिति रिपोर्ट के जरिए निगरानी बढ़ाई गई थी।
संसद में दी गई जानकारी के अनुसार खाड़ी संकट के दौरान हजारों भारतीय नाविकों की सुरक्षित वापसी भी कराई जा चुकी है। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा नाविक समुदाय वाला देश है।
बड़ी संख्या में भारतीय नाविक भारतीय झंडे वाले जहाजों के साथ विदेशी जहाजों पर भी काम करते हैं। इसलिए फारस की खाड़ी या काला सागर जैसे तनावग्रस्त इलाकों में किसी भी घटना का सीधा असर भारतीय परिवारों पर पड़ता है।
कश्मीर पर एर्दोगेन का बयान खारिज
संयुक्त राष्ट्र महाधिवेशन में पिछले दिनों तुर्की के राष्ट्रपति तैय्यप एर्दोगेन की तरफ से की गई बयानबाजी को भारत ने एक सिरे से खारिज कर दिया है। एमईए के प्रवक्ता रंधीर जायसवाल ने कहा है कि, पूरा जम्मू व कश्मीर भारत का एक संप्रभु मामला है।
इस बारे में किसी को भी बोलने का कोई अधिकार नहीं है। हमने तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगन का बयान देखा है जो काफी आपत्तिजनक है। हम इसे खारिज करते हैं।
