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SIR पर सियासत तेज: 13 करोड़ नाम कटे, विपक्ष ने CEC को घेरा तो BJP ने रखे चौंकाने वाले आंकड़े

Published: Sat, 26 Sep 2026 10:00 PM (IST)

एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बावजूद चुनाव आयोग में मतभेद से राजनीतिक विवाद गहरा गया है।

SIR पर सियासत तेज। (फाइल)

SIR पर सियासत तेज। (फाइल)

HighLights

  1. एसआईआर पर सुप्रीम कोर्ट की मुहर के बावजूद विवाद।

  2. विपक्ष ने 13 करोड़ नाम काटे जाने पर CEC को घेरा।

  3. भाजपा ने मतदाता सूची में चौंकाने वाली गड़बड़ियां बताईं।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एसआईआर (मतदाता सूची का गहन पुनरीक्षण) पर हालांकि सुप्रीम कोर्ट की मुहर लग चुकी है, लेकिन चुनाव आयोग के अंदर मतभेद की खबरों के कारण फिर से राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है।

विपक्ष एसआईआर में 13 करोड़ वोटरों के नाम काटे जाने और बड़ी संख्या में मतदाताओं को नोटिस भेजे जाने को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर हमलावर है।

लेकिन, दूसरा पहलू यह भी है कि एसआईआर के दौरान मतदाता सूची में चौंकाने वाली गड़बड़ियां सामने आ रही हैं। इसके अनुसार लगभग 99 प्रतिशत नोटिस मतदाताओं के नाम, उम्र आदि में गड़बड़ियों के चलते दिए जा रहे हैं।

बीएल संतोष ने सामने रखे तार्किक आंकड़ें

भाजपा के संगठन महासचिव बीएल संतोष ने सोशल मीडिया पर मतदाता सूची में गड़बड़ियों को लेकर लगाए गए आरोपों के जवाब में इन तार्किक आंकड़ों को सामने रखा है।

उन्होंने बताया कि दिल्ली में एसआईआर के दौरान जारी नोटिस में करीब 6.4 प्रतिशत नोटिस ऐसे हैं, जहां मतदाता सूची में सगे भाई-बहनों के बीच उम्र का अंतर नौ महीने या उससे कम है। पांच प्रतिशत नोटिस ऐसे हैं, जहां मतदाता और उसके माता-पिता की उम्र का अंतर 15 वर्ष से भी कम है।

ढाई प्रतिशत मामले ऐसे हैं, जहां माता-पिता और मतदाता की उम्र में 50 वर्ष से अधिक का अंतर दर्ज है। 2.3 प्रतिशत नोटिस ऐसे हैं, जहां मतदाता और उसके दादा-दादी की उम्र का अंतर 40 वर्ष से भी कम पाया गया है। 4.2 प्रतिशत नोटिस ऐसे लोगों को भी दिया गया है, जिनके छह या उससे अधिक बच्चों के नाम मतदाता सूची में दर्ज हैं।

आयोग ने 13 करोड़ मतदाताओं को मतदाता सूची से हटाया

देशभर में चल रही एसआईआर की इस प्रक्रिया के बीच चुनाव आयोग अब तक करीब 13 करोड़ मतदाताओं को मतदाता सूची से हटा चुका है या इसके लिए चिह्नित किया गया है। इनमें से करीब 2.8 करोड़ मृत मतदाता, तीन करोड़ अनुपस्थित, 6.3 करोड़ स्थायी रूप से स्थानांतरित व एक करोड़ मतदाताओं के नाम कई जगहों पर दर्ज हैं।