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जागरण विशेषः नवाचारी शिक्षक... चुटकियों में बच्चों को विज्ञान के रहस्य समझा देती हैं सिक्किम की सुषमा

Published: Wed, 16 Sep 2026 07:48 PM (IST)

सिक्किम की रसायन विज्ञान शिक्षिका सुषमा तामांग को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने शिक्षक दिवस पर राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया है।

चुटकियों में बच्चों को विज्ञान के रहस्य समझा देती हैं सिक्किम की सुषमा।

चुटकियों में बच्चों को विज्ञान के रहस्य समझा देती हैं सिक्किम की सुषमा।

HighLights

  1. शिक्षिका सुषमा तामांग को राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

  2. विज्ञान को व्यावहारिक जीवन से जोड़कर पढ़ाती हैं सुषमा।

  3. छात्रों ने राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।

जगन दहाल, गंगटोक। सिक्किम में पाक्योंग जिले के डिकलिंग में पीएमश्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय है, जहां पर रसायन विज्ञान की शिक्षिका हैं सुषमा तामांग। बचपन से बच्चों के सर्वांगीण विकास की कल्पना संजोए सुषमा ने शिक्षण में अनेक प्रयोग कर डाले।

उनका मानना है कि बालमन पर विषय प्रकरण की अमिट छाप छोड़ने के लिए जरूरी है कि उसे व्यावहारिक जीवन से जोड़कर पढ़ाया जाए। उनकी यह शिक्षण शैली रंग लाई। बच्चे रटने की जगह विषय को समझ कर पढ़ने लगे। परिणाम आशातीत मिले।

सुषमा ने वेस्ट मैनेजमेंट के क्षेत्र में भी बच्चों को जागरूक करने के लिए उल्लेखनीय काम किया। कचरे से खिलौने और अन्य उपयोगी सामग्री तैयार करना भी वे बच्चों को सिखाती हैं। इसके लिए उनको जापान जाने का भी मौका मिला। यह भी बच्चों की पढ़ाई का ही हिस्सा है।

उनकी पढ़ाने की विधा को राज्य से लेकर राष्ट्र तक ने सम्मान दिया। इस बार राष्ट्रपति पुरस्कार के लिए उनका नाम चयनित हुआ। पांच सितंबर को शिक्षक दिवस के मौके पर नई दिल्ली में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने उन्हें इस पुरस्कार से सम्मानित किया।

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उनकी शिक्षण शैली का सबसे बड़ा आधार है विज्ञान को रोजमर्रा की जिंदगी से जोड़ना। वह विद्यार्थियों से उनके गांव के पानी का नमूना मंगवाती हैं और स्कूल की प्रयोगशाला में खुद से उसकी गुणवत्ता जांच करवाती हैं। इससे बच्चे विज्ञान का महत्व समझते हैं और यह भी जान पाते हैं कि वे कैसा पानी पी रहे हैं। वह जिस पानी को पी रहे हैं, कहीं वह प्रदूषित तो नहीं।

इसी तरह गांव-गांव से खेतों की मिट्टी मंगवाकर उसकी जांच करवाती हैं। बच्चे भूमि की उर्वरता, वैज्ञानिक खेती और उसमें किस तत्व की कमी है, कैसे दूर होगी,यह सब व्यावहारिक रूप से सीखते हैं। कई अन्य प्रयोग भी नियमित रूप से कराए जाते हैं। परिणामस्वरूप विषय प्रकरण बालमन पर अमिट छाप छोड़ता है।

इस पद्धति का असर स्कूल के विद्यार्थियों की उपलब्धियों में साफ दिखता है। 2024 में स्कूल ने नेशनल लेवल क्लाइमेट एक्शन लीडरशिप चैलेंज में जीत हासिल की। इसी स्कूल की छात्रा प्रतिज्ञा सापकोटा को बेस्ट स्टूडेंट लीडर का खिताब मिला। इस वर्ष प्रतिज्ञा सापकोटा और प्रयत्ना तामांग अक्टूबर में आयोजित नेशनल इंस्पायर मानक अवॉर्ड में राज्य का प्रतिनिधित्व करेंगी।

कक्षा नौ की स्वीकृति छेत्री ने यंग रिपोर्टर्स फार द एनवॉयरनमेंट प्रतियोगिता में भारत का प्रतिनिधित्व किया। 11 से 14 वर्ष आयु वर्ग में वीडियो श्रेणी में वह राष्ट्रीय विजेता बनीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तीसरा स्थान हासिल किया। नगालैंड के कोहिमा में आयोजित नार्थ-ईस्ट इनोवेशन हैकाथान में भी प्रतिज्ञा और प्रयत्ना ने राज्य का प्रतिनिधित्व करते हुए विजेता बनने का गौरव पाया।

अभिभावकों का भी मिला साथ-सुषमा तामांग

13 वर्षों से शिक्षण में समर्पित 43 वर्षीय तामांग कहती हैं कि विद्यार्थियों के साथ अभिभावकों का भी उनको साथ मिला। इनके भरोसे ने ही और बेहतर करने की प्रेरणा दी। आज के विद्यार्थी जानकारी से लवरेज हैं। इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों के कारण उनमें ज्ञान की कमी नहीं है, पर उनको पढ़ाई पर केंद्रित रखना, अनुशासन विकसित करना और आत्मविश्वास पैदा करना ही बड़ी चुनौती है।

कई छात्र प्रतिभाशाली होने के बावजूद संकोची, लापरवाह या आत्मविश्वास की कमी से जूझते हैं। ऐसे विद्यार्थियों को व्यक्तिगत मार्गदर्शन देकर वह आगे बढ़ाती हैं।

स्कूल परिवार को सुषमा पर गर्व : प्रधानाध्यापक

डिकलिंग के पीएमश्री उच्चतर माध्यमिक विद्यालय के प्रधानाध्यापक दीपक शर्मा ने बताया कि शिक्षिका सुषमा शानदार काम कर रहीं। विशेषकर इनोवेटिव एआई के साथ लगातार जुड़ी रहती हैं। नई चीजों और संभावनाओं की खोज कर विद्यार्थियों तक पहुंचाती हैं।

बच्चों को स्कूल की सीमाओं से बाहर ले जाकर नई चीजें सीखने और आगे बढ़ने के अवसर देती हैं। उनको राष्ट्रपति पुरस्कार मिलना हम सभी के लिए गर्व की बात है।