सिक्किमी याक को मिली देश की आधिकारिक नस्ल की पहचान, पारंपरिक पशुपालन को मिलेगा नया संबल
सिक्किम की नाथांग घाटी में पहले हिमालयन याक महोत्सव का आयोजन किया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य पर्यटन, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा देना था।

सिक्किमी याक को मिली देश की आधिकारिक नस्ल की पहचान।
HighLights
नाथांग घाटी में पहला सिक्किम हिमालयन याक महोत्सव आयोजित।
सिक्किमी याक को मिली देश की आधिकारिक पंजीकृत नस्ल पहचान।
याक संरक्षण, पर्यटन और स्थानीय आजीविका को बढ़ावा।
जागरण संवाददाता, गंगटोक। सिक्किम के हिमालयी क्षेत्र में पर्यटन, जैव विविधता संरक्षण और स्थानीय लोगों की आजीविका को बढ़ावा देने के उद्देश्य से बुधवार को नाथांग घाटी में पहला सिक्किम हिमालयन याक महोत्सव आयोजित किया गया।
पशुपालन एवं पशु चिकित्सा सेवा विभाग ने अशोका ट्रस्ट फार रिसर्च इन इकोलाजी एंड द एनवायरनमेंट तथा जीबी पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान के सहयोग से इसका आयोजन किया। सिक्किम विधानसभा अध्यक्ष एमएन शेर्पा कार्यक्रम के मुख्य अतिथि थे।
महोत्सव की प्रमुख उपलब्धि सिक्किमी याक को देश की आधिकारिक रूप से पंजीकृत नस्ल के रूप में पहचान मिलना रहा। इसे राज्य में याक संरक्षण और पारंपरिक पशुपालन को प्रोत्साहित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
याक हिमालयी समाज की संस्कृति- विधानसभा अध्यक्ष
विधानसभा अध्यक्ष एमएन शेर्पा ने कहा कि याक हिमालयी समाज की संस्कृति, परंपरा और जीवनशैली का अभिन्न हिस्सा है। उन्होंने याक और याक पालकों की घटती संख्या पर चिंता जताते हुए इनके संरक्षण के साथ पर्यटन और स्थानीय कारोबार को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने याक के ऊन से बनने वाले पारंपरिक कपड़ों और अन्य उत्पादों के उत्पादन तथा विपणन को प्रोत्साहित करने की बात भी कही।
पशुपालन एवं मत्स्य विभाग के मंत्री पुरण कुमार गुरुंग ने याक संरक्षण के लिए विभाग की ओर से किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। वहीं, विधायक पामिन लेप्चा ने याक आधारित उत्पादों, बेहतर प्रजनन पद्धतियों और पर्यटन के माध्यम से ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ाने की संभावनाएं बताईं।
विभिन्न कार्यक्रमों का भी आयोजन
कार्यक्रम में याक उत्पादों और पारंपरिक पशुपालन से संबंधित प्रदर्शनियों के साथ लोकगीत, गोरशे नृत्य, याक नृत्य, पारंपरिक खेल और याक आधारित फैशन शो आयोजित किए गए। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे याक पालकों, शोधकर्ताओं और स्थानीय समुदायों ने अपने अनुभव साझा किए।
आयोजकों के अनुसार, महोत्सव का उद्देश्य हिमालयी विरासत को संरक्षित करने के साथ ग्रामीण पर्यटन, स्थानीय उत्पादों के विपणन और सीमावर्ती ऊंचाई वाले क्षेत्रों में टिकाऊ आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देना है।
