सिक्किम के प्राणी उद्यान में रेड पांडा के 5 नए शावकों का जन्म, घोरल और भालू के बच्चे भी आए नजर
सिक्किम के हिमालयी प्राणी उद्यान में संरक्षण कार्यक्रम के तहत पांच रेड पांडा शावकों, दो हिमालयी काले भालू और चार हिमालयी घोरल बच्चों का जन्म हुआ है।

रेड पांडा।
HighLights
सिक्किम प्राणी उद्यान में पांच रेड पांडा शावकों का जन्म।
दो हिमालयी काले भालू और चार घोरल बच्चों का भी जन्म।
संकटग्रस्त रेड पांडा संरक्षण प्रयासों के लिए यह बड़ी उपलब्धि।
जागरण संवाददाता, गंगटोक। सिक्किम के हिमालयी प्राणी उद्यान में इस वर्ष संरक्षण कार्यक्रम के तहत रेड पांडा के पांच शावकों का जन्म हुआ है। इसके साथ ही हिमालयी काले भालू के दो शावक और हिमालयी घोरल के चार बच्चों का भी जन्म दर्ज किया गया है।
हिमालयी घोरल को पहाड़ी बकरी भी कहा जाता है। राजधानी गंगटोक के बुलबुले स्थित हिमालयी प्राणी उद्यान में रेड पांडा का संरक्षण प्रजनन कार्यक्रम वर्ष 1997 से संचालित हो रहा है।
उद्यान प्रबंधन के अनुसार नवजात वन्यजीवों के जीवन के शुरुआती तीन महीने बेहद संवेदनशील होते हैं। इसलिए शावकों की लगातार निगरानी की जा रही है। मानवीय हस्तक्षेप को न्यूनतम रखा गया है और केवल आवश्यक स्वास्थ्य जांच के दौरान पशु चिकित्सकों तथा देखभाल कर्मचारियों को हस्तक्षेप की अनुमति है।
हिमालयी प्राणी उद्यान में अप्रैल में हिमालयी काले भालू के दो शावकों का भी जन्म हुआ।
दोनों शावक चिड़ियाघर में पली मादा थोमचुंग के हैं। इन नए जन्मों के बाद उद्यान में हिमालयी काले भालुओं की संख्या बढ़कर छह हो गई है। इसी तरह हिमालयी घोरल के चार बच्चों का जन्म भी दर्ज किया गया है। रेड पांडा सिक्किम का राज्य पशु है और अंतरराष्ट्रीय प्रकृति संरक्षण संघ की रेड लिस्ट में संकटग्रस्त प्रजाति के रूप में दर्ज है। ऐसे में संरक्षण प्रजनन केंद्र में रेड पांडा के शावकों का जन्म सिक्किम के संरक्षण प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।
