नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए प्रार्थना, सिक्किम के पेलिंग में दुनिया में शांति के लिए जुटा बौद्ध भिक्षु समुदाय
सिक्किम के पेलिंग में सात दिवसीय मणि डुंगट्रुप चेनमो 2026 शुरू हुआ, जिसमें शांति और करुणा के लिए प्रार्थना की जा रही है।
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नेपाल बाढ़ पीड़ितों के लिए शांति प्रार्थना (फोटो-पीटीआई)
HighLights
पेलिंग, सिक्किम में सात दिवसीय मणि डुंगट्रुप चेनमो का आयोजन।
नेपाल बाढ़ पीड़ितों और प्रभावितों के लिए विशेष प्रार्थनाएं।
शांति, करुणा और सभी प्राणियों के कल्याण की कामना।
डिजिटल डेस्क, गंगटोक। सिक्किम के पेलिंग स्थित चेनरेजिग सिंगखाम रिवो पोटाला में सात दिवसीय मणि डुंगट्रुप चेनमो 2026 शनिवार से शुरू हुआ।
शांति, करुणा और सभी प्राणियों के कल्याण की कामना के लिए आयोजित इस धार्मिक अनुष्ठान में राज्य के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में बौद्ध भिक्षु, भिक्षुणियां और श्रद्धालु शामिल हो रहे हैं।
इस वर्ष के आयोजन में नेपाल में हाल में आई ग्लेशियल बाढ़ के पीड़ितों और प्रभावित समुदायों के लिए विशेष प्रार्थना की जा रही है।
सामूहिक प्रार्थना में आपदा में जान गंवाने वालों की शांति, शोकाकुल परिवारों को संबल तथा प्रभावित लोगों के शीघ्र उबरने की कामना की जा रही है।
सात दिवसीय मणि डुंगट्रुप चेनमो 2026
सिक्किम से लगे हिमालयी क्षेत्र में प्राकृतिक आपदाओं के बढ़ते जोखिम के बीच इस पहल का मानवीय पहलू भी खासा महत्वपूर्ण है।
मणि दुंगद्रुप चेनमो का आयोजन सिक्किम सरकार के धर्म विभाग की ओर से किया जा रहा है। अनुष्ठान आध्यात्मिक मार्गदर्शन के तहत हो रहा है जिसमें विभिन्न बौद्ध मठों से आए भिक्षु सामूहिक रूप से मणि मंत्र और अन्य धार्मिक प्रार्थनाओं का पाठ कर रहे हैं।
भगवान चेनरेजिग यानी अवलोकितेश्वर को करुणा का प्रतीक माना जाता है और अनुष्ठान के दौरान दुखों के निवारण, शांति और सद्भाव की कामना की जा रही है।
उद्घाटन कार्यक्रम में धर्म विभाग की सचिव किंचो डोमा लेप्चा, गेजिंग के जिलाधिकारी तेनजिंग डी. डेंजोंगपा और पुलिस अधीक्षक पारू रुचाल सहित विभागीय अधिकारी, कर्मचारी और श्रद्धालु मौजूद रहे। यह मणि डुंगड्रुप चेनमो का चौथा वार्षिक आयोजन है।
राज्य के विभिन्न मठों से भिक्षुओं और भिक्षुणियों की भागीदारी से आयोजन का स्वरूप व्यापक हुआ है। कार्यक्रम 18 सितंबर तक चलेगा। धर्म विभाग के अनुसार, इस आयोजन का उद्देश्य धार्मिक परंपराओं के संरक्षण के साथ शांति, करुणा और सामाजिक सद्भाव की भावना को मजबूत करना भी है।
