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'विपक्ष का विरोध रहा विफल, देश ने वीबी जी रामजी को किया स्वीकार', शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर साधा निशाना

Published: Wed, 18 Mar 2026 12:14 AM (IST)

ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राज्यसभा में कहा कि देश ने वीबी जी रामजी योजना को स्वीकार कर लिया है, विपक्ष का विरोध विफल रहा।

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर साधा निशाना(फोटो: एएनआई)

शिवराज सिंह चौहान ने कांग्रेस पर साधा निशाना(फोटो: एएनआई)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को राज्यसभा में कहा कि वीबी जी रामजी के खिलाफ विपक्ष का विरोध जनसमर्थन हासिल करने में विफल रहा है, क्योंकि देश ने इसे इसके पिछले संस्करण, मनरेगा से बेहतर योजना के रूप में स्वीकार कर लिया है।

चौहान ने कांग्रेस पर महात्मा गांधी के सिद्धांतों की अवहेलना करने और केवल वोटों के लिए योजना का नाम नरेगा से मनरेगा करने का आरोप लगाया।

कांग्रेस पर लगाया आरोप

उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस शासनकाल में जवाहरलाल नेहरू, इंदिरा गांधी और राजीव गांधी के नाम पर 600 सरकारी योजनाएं शुरू की गईं, जबकि चंद्र शेखर आजाद, रानी लक्ष्मीबाई और सरदार वल्लभभाई पटेल जैसे नेताओं को नजरअंदाज कर दिया गया।

उन्होंने कहा, “2006-07 से 2013-14 तक यूपीए सरकार ने 2,12,409 करोड़ रुपये खर्च किए, जबकि मोदी सरकार ने 8,58,346.71 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।''

यूपीए सरकार की तुलना में राज्यों को अधिक धनराशि आवंटित

मौजूदा सरकार ने यूपीए सरकार की तुलना में राज्यों को अधिक धनराशि आवंटित की है। चौहान ने सदन को सूचित किया कि मनरेगा के तहत फर्जी वाउचर और फर्जी बिल जैसे धन के दुरुपयोग की 11 लाख शिकायतें मिलने पर वीबी जी राम जी बनाते समय इन मुद्दों को ध्यान में रखा गया और ऐसे दुरुपयोग को रोकने के लिए प्रविधान किए गए हैं।

उन्होंने दावा किया कि मोदी सरकार ने धन जारी करने में किसी भी राज्य के साथ भेदभाव नहीं किया है। साथ ही चौहान ने कहा कि सरकार ने किसानों की आय और सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।

सरकार एकीकृत कृषि माडल विकसित करने पर काम कर रही है, जो छोटे किसानों के लिए भी लाभदायक होगा।

चालू वित्त वर्ष में मनरेगा के तहत 81,500 करोड़ रुपये जारी

लोकसभा में लिखित उत्तर में ग्रामीण विकास राज्य मंत्री कमलेश पासवान ने कहा कि 11 मार्च 2026 तक महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना के तहत वर्ष 2025-26 के दौरान कुल 81,502.62 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।

इसमें मजदूरी भुगतान के लिए 65,875.13 करोड़ रुपये और सामग्री एवं प्रशासनिक घटकों के लिए 15,627.48 करोड़ रुपये शामिल हैं।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)