विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

CJI और अदालत पर टिप्पणी कर फंसे संजय राउत, SC ने 17 नवंबर को पेश होने का दिया आदेश

Published: Wed, 28 Oct 2026 03:50 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत को CJI और न्यायपालिका पर टिप्पणी से जुड़े अवमानना मामले में 17 ...और पढ़ें

सांसद संजय राउत की तस्वीर। (फाइल)

सांसद संजय राउत की तस्वीर। (फाइल)

HighLights

  1. संजय राउत को अवमानना मामले में SC ने बुलाया।

  2. CJI और न्यायपालिका पर टिप्पणी का है मामला।

  3. निखिल वागले को भी वर्चुअल पेशी का आदेश।

पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को शिवसेना (यूबीटी) सांसद संजय राउत को 17 नवंबर को अदालत में व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया है। यह मामला भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) और न्यायपालिका के बारे में की गई टिप्पणियों से जुड़ी अवमानना कार्यवाही का है।

न्यायमूर्ति अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति विपुल एम. पंचोली की पीठ ने पत्रकार निखिल वागले को भी उसी दिन वर्चुअल तरीके से अदालत के सामने पेश होने का निर्देश दिया है।

कोर्ट ने जारी किया था कारण बताओ नोटिस

16 अक्टूबर को, शीर्ष अदालत ने इस मामले में संजय राउत और निखिल वागले को 'कारण बताओ' नोटिस जारी किया था। हालांकि, अदालत ने उन्हें अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने से छूट दे दी थी, यह कहते हुए कि वह पहले उनके स्पष्टीकरण पर विचार करेगी। ये 'कारण बताओ' नोटिस सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) द्वारा दायर एक अवमानना याचिका पर जारी किए गए थे।

विपक्षी पार्टियों ने किया था सुप्रीम कोर्ट का मार्च

बता दें कि संजय राउत फिलहाल विपक्षी पार्टियों के साथ सुप्रीम कोर्ट का मार्च किया था। विपक्षी पार्टी के सदस्य मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस मार्च पर सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने तीखी टिप्पणी की थी। उन्होंने कहा था कि हमें कोई डरा या धमका नहीं सकता। इसी कड़ी में संजय राउत और राहुल गांधी सहित 12 विपक्षी नेताओं ने मिलकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है।

एक समाचार पत्र की रिपोर्ट के बाद से विपक्षी पार्टियों सहित कॉकरोच जनता पार्टी के सदस्य सड़क पर उतर कर प्रदर्शन कर रहे हैं। रिपोर्ट में कहा गया था कि चुनाव आयोग में सर्वसम्मति से फैसले नहीं हो रहे हैं। इस पर विपक्षी पार्टी ज्ञानेश कुमार का इस्तीफा मांग रहे हैं। इस पर विरोध जताने के लिए सीजेपी ने जंतर मंतर पर प्रदर्शन का ऐलान किया था। बाद में सरकार ने जंतर मंतर को प्रदर्शन करने वाली जगहों की लिस्ट से हटा दिया।