नई दिल्ली [जाब्यू]। आंतरिक सुरक्षा को चुस्त-दुरुस्त करने का सबसे ज्यादा श्रेय भले ही पी चिदंबरम ने लूटा हो, लेकिन ढीले-ढाले माने जाने वाले मौजूदा गृह मंत्री सुशील कुमार शिंदे रिकार्ड में मामले में उनसे बीस साबित हो रहे हैं। अक्सर अपने विचित्र बयानों की वजह से हंसी का पात्र बनने वाले शिंदे के कार्यकाल में ही संप्रग सरकार ने विपक्ष से आंतरिक सुरक्षा में कमजोर साबित करने वाले सारे मुद्दे ही छीन लिए। यासीन भटकल की गिरफ्तारी ने खुफिया व सुरक्षा एजेंसियों को बड़ा शिकार दिया ही है साथ ही केंद्र सरकार को सियासी मोर्चे पर भी बड़ी राहत दी है।

महंगाई और भ्रष्टाचार के अलावा केंद्र की संप्रग सरकार को मुख्य विपक्षी दल भाजपा सबसे ज्यादा आंतरिक सुरक्षा और तुष्टीकरण के मुद्दे पर घेरती रही है। अब इस संयोग कहें कि ऐसे ज्यादातर मुद्दे शिंदे के गृह मंत्री रहते संप्रग ने लगभग खत्म कर दिए। भले ही प्रत्यक्ष रूप से इसमें शिंदे का योगदान न रहा हो, लेकिन ये सफलताएं उनके ही खाते में जुड़ रही हैं। सबसे पहले मुंबई हमले के गुनहगार पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद अजमल आमिर कसाब और फिर संसद हमले के मास्टरमाइंड मोहम्मद अफजल को फांसी शिंदे के ही कार्यकाल में ही हुई।

यही नहीं, हिंदुस्तान में आतंक फैलाने वाले कई मोस्टवांटेड अपराधी भी शिंदे के गृहमंत्री बनने के बाद ही पकड़े गए। मुंबई हमले में सीमा पार आतंकी कैंप से हमले का संचालन कर रहा अबू जुंदाल की गिरफ्तारी हो या फिर सऊदी अरब से लाया गया फसी मुहम्मद, ये सभी चिदंबरम के गृह मंत्री पद से हटने के बाद ही पकड़ में आ सके। चंद दिन पहले सीमा पार से आतंकी गतिविधियां संचालित करने वाला करीम टुंडा पकड़ा गया। अब 2006 से हिंदुस्तान में आतंक का चेहरा रहे इंडियन मुजाहिद्दीन का संस्थापक सदस्य यासीन भटकल भी सुरक्षा एजेंसियों के हत्थे चढ़ गया।

कांग्रेस ने भी इसे सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस की सफलता करार दिया है। साथ ही कहा कि यह आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई की देश की इच्छाशक्ति का सुबूत है। कांग्रेस में भी इस बात पर चुटकी ली जा रही है कि उनकी सरकार के सबसे तेजतर्रार मंत्री माने जाने वाले चिदंबरम जो नहीं कर सके, वह कम आंके जाने वाले शिंदे ने कर दिखाया।

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