शरद पूर्णिमा पर बिखरी दूधिया रोशनी, तस्वीरों में देखें चंद्रमा के अलग-अलग रूप
शरद पूर्णिमा हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखती है, जिसमें रात को माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा की जाती ...और पढ़ें

शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा का अलग रूप। (फोटो- पीटीआई।)
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। शरद पूर्णिमा को हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। इस दिन व्रत रखा जाता है और रात के समय माता लक्ष्मी और चंद्रमा की पूजा होती है।
पूर्णिमा तिथि की शुरुआत सुबह 11 बजकर 57 मिनट से हुई और रात के समय पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को ही थी। शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होकर अमृत वर्षा करता है।

ऐसा माना जाता है कि इस दिन चंद्रमा को रोशनी से अमृत की वर्षा होती है और चंद्रमा के प्रकाश में जो खीर रखी जाती है उसमें भी इस अमृत का प्रभाव होता है। ऐसे में इस दिन घर की समृद्धि के लिए कुछ विशेष उपाय किए जाते हैं।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, इस पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है क्योंकि चंद्रमा को मन, भावनाओं और मानसिक शांति का कारक माना जाता है।

पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को सुबह 11:55 बजे शुरू होकर 26 अक्टूबर को सुबह 9:41 बजे समाप्त होगी।

हिंदू पंचांग के अनुसार, इसे कोजागरी पूर्णिमा और रास पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन कई श्रद्धालु चंद्र देव और मां लक्ष्मी की पूजा करते हैं।

शरद पूर्णिमा को रास पूर्णिमा, कोजागरा पूर्णिमा, शरद पूनम के नाम से भी जाना जाता है।

शाम को चंद्रमा के दर्शन के बाद श्रद्धालु परंपरा के अनुसार जल से अर्घ्य दे सकते हैं और चंद्र देव का स्मरण करते हैं। इसके बाद मां लक्ष्मी की पूजा और प्रसाद अर्पित किया जाता है। व्रत रखने वाले लोग अपनी सेहत और पारिवारिक परंपरा के अनुसार नियम अपनााएं।
