जयपुर (जेएनएन)। राजस्थान के पिछड़े इलाकों में गिने जाने वाले मेव बाहुल्य क्षेत्र कामां में इस बार एक ऐसी सरपंच चुनी गई है जो इस समय एमबीबीएस कर रही है। शहनाज खान नाम की इस सरपंच का चुनाव हाल में हुए पंचायत उपचुनाव में हुआ है।

राजस्थान के भरतपुर जिले का कामां क्षेत्र मेव बाहुल्य क्षेत्र है और शिक्षा व विकास की दृष्टि से इसे काफी पिछड़ा इलाका माना जाता है, हालांकि सरपंच बनने के लिए शैक्षणिक योग्यता का नियम लागू किए जाने के बाद यहां कुछ बदलाव दिख रहा है। इसी के बीच 24 वर्ष की शहनाज खान कामां सरपंच चुनी गई है।

वैसे शहनाज का पूरा परिवार राजनीति में सक्रिय रहा है। वे राजस्थान की पिछली कांग्रेस सरकार में संसदीय सचिव रह चुकी जाएदा खान की बेटी है। उनके नाना तैय्यब हुसैन भी राजनीति में थे और अकेले ऐसे नेता रहे जो राजस्थान, पंजाब और हरियाणा तीनों राज्यों में विधायक रहे।

जिस पद पर शहनाज जीती है, उस पर उनके दादा हनीफ खान पिछले चार दशक से जीत रहे थे। शहनाज इस समय मुरादाबाद के एक मेडिकल कालेज से एमबीबीएस कर रही है। अपनी इंटर्नशिप वे गुरूग्राम से करेंगी जो उनकी पंचायत से ज्यादा दूर नहीं है। सुबह-शाम और रविवार को वे अपने गांव में रह कर सरपंच का दायित्व निभाएंगी। उनका कहना है कि इस क्षेत्र में लड़कियों की पढ़ाई का काम सबसे जरूरी है और वे इसी पर ध्यान देंगी। 

शहनाज का कहना है कि राजस्थान में पंचायत का चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम 10वीं कक्षा पास होना आवश्यक होना भी मेरा राजनीति में आने का प्रमुख कारण रहा। शहनाज के दादा पर फर्जी मार्कशीट के आधार पर चुनाव लड़ने का आरोप था और इसी कारण उनका चुनाव खारिज हो गया।

शहनाज का कहना है कि मेरे सरपंच बनने से मेवात की लड़कियां शिक्षा को लेकर जागरूक होंगी। अभिभावक भी इस ओर ध्यान देंगे। शहनाज का कहना है कि उत्तरप्रदेश, हरियाणा और राजस्थान के मेवात इलाके में रहने वाले लोगों को शैक्षिक, आर्थिक और राजनीतिक दृष्टि से पिछड़ा माना जाता है। अब इस पिछड़ेपन को दूर करना मेरा मुख्य मकसद रहेगा।

By Sanjay Pokhriyal