नई दिल्ली, (अनुराग मिश्रा)। अफगानिस्तान से आ रहे धूल के गुबार में फंसकर दिल्ली और एनसीआर के लोग हांफ रहे हैं लेकिन इससे निजात के फिलहाल कोई आसार नहीं है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने तोे लाचारी जता दी है, एेसे में राहत की आस बारिश से ही है। बारिश होने के बाद ही धूल का कहर थमेगा तभी गर्द से छुटकारा मिलेगा।
ईरान और दक्षिण अफगानिस्तान की तरफ से धूल भरी हवाएं 20 हजार फीट ऊंचाई से राजस्थान के रास्ते से दिल्ली ही नहीं बल्कि नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम, फरीदाबाद, सोनीपत में कहर बरपा रही है। सांस लेने के साथ ही अहसास हो रहा है कि धूल नाक के रास्ते मुंह में आ रही है। दरअसल, धूल के महीन कण हवा में ही घुलकर सांसों के जरिए लोगों के शरीर में पहुंच रहे हैं लेकिन इससे फिलहाल राहत की कोई उम्मीद नहीं दिख रही है। एक तो दिल्ली पहले ही प्रदूषण की मार से जूझ रहा है, उस पर इस नई मुसीबत ने यहां लोगों की जिंदगी के लिए बड़ा खतरा बन गई है।

मौसम विभाग 17 जून को बारिश की संभावना जता रहा है। बारिश हुई तो लोगों को काफी राहत मिल सकती है, वरना लोगों के लिए समस्या बनी रहेगी। पर्यावरण विशेषज्ञ बताते हैं कि धूल के गुबार वाकई एनसीआर के लिए बड़ी समस्या हैं। इनसे निजात तभी मिल सकती है जब बारिश हो। बारिश में यह धूल के कण धरती पर बैठेंगे तभी बढ़ते प्रदूषण से निजात मिलेगी। फिलहाल तो बचाव से ही राहत मिल सकती है।

एेसे कर सकते हैं बचाव
- वाहन चलाते समय गीला रुमाल चेहरे पर बांधें और हेलमेट जरूर लगाएं ताकि धूल के महीन कण सांसों के जरिए शरीर में न पहुंचने पाएं।
- घर में झाड़ूं-पोंछा न करें, सफाई बहुत जरूरी है तो उस दौरान घर से बाहर ही रहें।
- घर में सफाई होते समय नाक, मुंह पर बारीक कपड़ा बांधें या मास्क लगाएं।
- घर की सफाई फिल्टर वाले वैक्यूम क्लीनर से करें।
- घर में धूम्रपान कतई न करें।
-  किचन में एग्जास्ट लगवाएं।
- धुआं रहित ईंधन का उपयोग करें। 
- एलर्जी पैदा करने वाले कारकों से दूर रहने का प्रयास करें।

होने वाली दिक्कतें
- एलर्जी का स्थाई उपचार नहीं है. जब तक व्‍यक्ति एलर्जी पैदा करने वाली वजहों के संपर्क में नहीं आता स्वस्थ रहता है।
- धूल से होने वाली एलर्जी की वजह से दमा, आंखों में लाली, पानी, नाक से पानी बहने, जलन के साथ ही खुजली होने लगती है।
- हवा में जब धूल बढ़ जाती है तो यह सेहत के लिए सबसे खतरनाक होती है। धूल के छोटे कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश करते हैं। हवा के साथ-साथ ये कण रक्त में भी चले जाते हैं और विभिन्न अंगों तक पहुंचकर फेफड़ों व अन्य अंगों को प्रभावित करते हैं। 
- दिल, मधुमेह, अस्थमा और अन्य बीमारियों के रोगियों के लिए यह प्रदूषण जानलेवा है। उन्हें कार्डियोवस्कुलर दौरे भी पड़ सकते हैं या कभी-कभी अंग फेल हो जाते हैं। दरअसल, धूल के कण जब ऑक्सीजन के साथ रक्त कोशिकाओं में पहुंचते हैं तो ये उन्‍हें चिपचिपा कर देते हैं। इससे ब्‍लड में मौजूद प्लेटलेट्स आपस में चिपक जाते हैं और रक्त में जरूरत से ज्यादा थक्के बनने लगते हैं। यदि धूल भरे गुबार में ज्‍यादा समय तक रुकना पड़े तो यह कोरोनरी धमनियों में रुकावट पैदा कर सकती है।

Posted By: Jagran News Network