जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। एक तरफ जहां रक्षा को लेकर केंद्र सरकार सशक्त होने का दावा कर रही है, वहीं उप सेना प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल शरदचंद का बयान सरकार को असहज कर सकता है। उन्होंने बजट में सैन्य आधुनिकीकरण योजना के लिए बेहद कम बजट आवंटन पर उंगली उठाते हुए कहा कि जो राशि तय की गई है उसमें मेक इन इंडिया के तहत सैन्य आधुनिकीकरण की कई परियोजनाएं बंद करनी पड़ सकती है। उन्होंने संसदीय समिति के सामने यह बयान दिया था। जाहिर है कि विपक्ष इसे भी मुद्दा बना सकता है।

-2018-19 के बजट ने आधुनिकीकरण की उम्मीदों पर फेरा पानी

-बजट में कमी से बंद हो सकती है कई परियोजनाएं

- सेना के 68 फीसद साजो समान संग्रहालय में रखने लायक

भाजपा नेता मेजर जनरल रिटायर्ड बीसी खंडूरी की अध्यक्षता वाली रक्षा संबंधी संसदीय स्थाई समिति की यह रिपोर्ट मंगलवार को संसद में रखी गई। लेफ्टिनेंट जनरल शरदचंद ने संसदीय समिति के समक्ष अपने मौखिक बयान में कहा है कि 2018-19 के रक्षा बजट ने सैन्य आधुनिकीकरण की सेना की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। वास्तव में रक्षा बजट सेना के लिए एक झटके से कम नहीं है।

उप थल सेना प्रमुख ने उम्मीद से कम बजट आवंटन की चुनौतियों से समिति को रुबरू कराते हुए कहा है कि कुछ मदों में राशि की जो वृद्धि की गई है वह टैक्स आदि के खर्च की भरपाई के लिए भी पर्याप्त नहीं है। आधुनिकीकरण के लिए 21,338 करोड़ के आवंटन को अपर्याप्त बताते हुए उन्होंने कहा है कि यह तो पहले से चिन्हित और तय 29,033 करोड रुपये के खर्च को पूरा नहीं कर पाएगा।

उन्होंने कहा है कि आपात स्थिति के लिए खरीद समेत 125 स्कीमों की जरूरत भी इससे पूरी नहीं होगी। वहीं पिछले वित्त वर्ष की देनदारी का दबाव भी इसी पर होगा और यह सेना के लिए आर्थिक तंगहाली की स्थिति होगी। इन परिस्थितियों से साफ है कि आधुनिकीकरण के लिए वस्तुत: सेना के पास बजट में शायद ही कुछ बचेगा।

लेफ्टिनेंट जनरल शरदचंद ने संसदीय समिति से सेना के हथियारों और साजो समान की मौजूदा वास्तविकता की भी खोल कर रख दी है। उन्होंने बताया कि सेना का 68 फीसद साजो समान विटेंज श्रेणी यानि संग्रहालय में विरासत के रुप में रखने लायक हो चुके हैं। केवल 24 फीसद साजो समान ही मौजूदा समय के लायक हैं। जबकि सेना के पास केवल 8 फीसद साजो समान ही ऐसे हैं जो पूरी तरह स्टेट आफ द आर्ट आधुनिक हैं। जबकि किसी मौजूदा समय में किसी भी आधुनिक सेना के पास एक तिहाई साजो समान विटेंज श्रेणी, एक तिहाई मौजूदा जरूरत के अनुकूल और एक तिहाई स्टेट आफ द आर्ट आधुनिक साजो समान का औसत होना चाहिए। इस पैमाने पर भी भारतीय सेना गंभीर चुनौतियों का सामना कर रही है।

उप सेना प्रमुख ने चीन से लगी सीमा पर उसकी निर्माण गतिविधियों को देखते हुए अपनी सीमा से सटी सड़कों और ढांचागत सुविधिाओं के विकास को गति देने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस जरूरत को पूरा करने के लिहाज से भी बजट में सेना की मांग से 902 करोड़ रुपये कम मिले हैं।

By Bhupendra Singh