जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। आयकर विभाग की ओर से केयर्न इंडिया को भेजे गए 20,495 करोड़ रुपये के टैक्स डिमांड नोटिस के खिलाफ याचिका पर दिल्ली हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार से जवाब मांगा है। आयकर विभाग ने केयर्न की मूल कंपनी द्वारा 10 साल पहले शेयर ट्रांसफर करने के दौरान हुए मुनाफे पर टैक्स जमा कराने के लिए नोटिस जारी किया था। हाई कोर्ट ने संबंधित मंत्रालय को नोटिस जारी कर चार अगस्त तक जवाब दाखिल करने को कहा है।

कंपनी की याचिका में कहा गया था कि आयकर विभाग ने डिमांड नोटिस भेजने में जरूरत से ज्यादा देरी कर दी है। विभाग ने अपनी शक्तियों को गलत इस्तेमाल किया है। सरकार ने वर्ष 2016 के बजट में पिछली तारीख से टैक्स वसूली के मामले में एकमुश्त निपटारे का मौका दिया था। कंपनी 20,495 करोड़ के टैक्स विवाद को निपटाने के लिए सरकार के प्रस्ताव पर विचार कर रही है, मगर अब तक समझौता नहीं हो सका है। एकमुश्त निपटारे के तहत कंपनियों को केवल मूल टैक्स देना होगा। उन्हें ब्याज व जुर्माने से छूट दी जाएगी।
अदालत से अपील की गई कि कंपनी के टैक्स डिमांड नोटिस को रद किया जाए।

वर्ष 2006 में केयर्न समूह में अंदरुनी पुनर्गठन किया गया था। ब्रिटिश कंपनी केयर्न एनर्जी ने अपने 100 फीसद शेयर केयर्न इंडिया को ट्रांसफर कर दिए थे। इसमें कंपनी को कोई लाभ नहीं हुआ। पूर्व में अदालतों ने अपने फैसलों में स्पष्ट कहा है कि विभाग इस तरह का टैक्स केवल चार साल के अंदर ही वसूलने का हकदार है। लिहाजा कंपनी को इससे छूट मिलनी चाहिए।

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