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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jan 30, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

Beating Retreat Ceremony 2024: 'बीटिंग रिट्रीट' की शानदार तस्‍वीरें देख आप भी कह उठेंगे वाह...

Published: Tue, 30 Jan 2024 08:40 PM (IST)

Beating Retreat Ceremony 2024विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट में सेना व अर्द्धसैनिक बलों की बैंडों द्वारा शानदार संगीतमय प्रस्तुति के ...और पढ़ें

त्रि-सेवा बैंड टुकड़ियों के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने की मुलाकात (फोटो-ANI)
त्रि-सेवा बैंड टुकड़ियों के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने की मुलाकात (फोटो-ANI)

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट में सेना व अर्द्धसैनिक बलों की बैंडों द्वारा शानदार संगीतमय  प्रस्तुति के साथ सोमवार को गणतंत्र दिवस समारोह संपन्न हुआ। वहीं, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को गणतंत्र दिवस परेड और बीटिंग रिट्रीट समारोह 2024 में भाग लेने वाले त्रि-सेवा बैंड टुकड़ियों के कर्मियों से मुलाकात की। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने त्रि-सेवा बैंड टुकड़ियों के साथ इस दौरान बातचीत भी की। 

सोमवार को हुए इस समारोह के मौके पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह सहित कई केंद्रीय मंत्री, चीफ आफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, तीनों सेनाओं के प्रमुख व वरिष्ठ अधिकारियों के साथ आम लोगों ने इस उत्सव का आनन्द उठाया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को नई दिल्ली में गणतंत्र दिवस परेड और बीटिंग रिट्रीट समारोह 2024 में भाग लेने वाले त्रि-सेवा बैंड टुकड़ियों के साथ एक समूह तस्वीर खिंचवाई।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मंगलवार को नई दिल्ली में एक बैठक के दौरान गणतंत्र दिवस परेड और बीटिंग रिट्रीट समारोह 2024 में भाग लेने वाले त्रि-सेवा बैंड टुकड़ियों के साथ बातचीत की।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु त्रि-सेवा बैंड टुकड़ियों के साथ एक समूह तस्वीर के लिए पोज देते हुए देखी गईं। 

भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस बैंड दल ने सोमवार को जम्मू के मौलाना आजाद स्टेडियम में बीटिंग रिट्रीट समारोह के दौरान प्रदर्शन किया।

सोमवार को नई दिल्ली के विजय चौक पर बीटिंग रिट्रीट समारोह के दौरान त्रि-सेवा बैंड ने प्रदर्शन किया।

आपको बता दें कि बिटिंग रिट्रीट सदियों पुरानी सैन्य परंपरा का प्रतीक है, जब सेनाएं सूर्यास्त होने पर लड़ना बंद कर देती थीं, और युद्ध मैदान से शिविरों में लौट आती थीं। यह समारोह बीते समय की यादें ताजा करता है।

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