जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने एक बार मे तीन तलाक यानी तलाक ए बिद्दत को असंवैधानिक घोषित कर दिया है लेकिन तलाक के दूसरे प्रकार अभी भी वैध हैं और वे पूर्व की भांति ही लागू रहेंगे। यानि कोई भी शौहर कुरान के मुताबिक एक-एक माह के अंतराल पर तीन बार तलाक कह कर बीवी से संबंध खत्म कर सकता है। तलाक की यह विधि अभी भी कानूनन वैध और मान्य है।

तलाक अहसन मुसलमानों में तलाक की सबसे अधिक मान्य प्रक्रिया है। इसमें कोई भी व्यक्ति अपनी पत्नी को एक बार तलाक देता है लेकिन पत्नी को छोड़ता नहीं है वह उसके साथ ही रहती है। अगर तीन महीने के अंतराल में दोनों के बीच सुलह नहीं हुई तो तीन महीने की इद्दत अवधि पूरी होने के बाद तलाक प्रभावी हो जाता है और दोनों के बीच पति - पत्नी का रिश्ता समाप्त हो जाता है। तलाक हसन में शौहर अपनी बीवी को एक- एक महीने के अंतराल पर तलाक देता है इस बीच अगर दोनों में रिश्ता नहीं बना और सुलह नहीं हुई तो तीसरे महीने तीसरी बार तलाक कहने पर उनका संबंध खत्म हो जाता है। पत्नी 90 दिन की इद्दत गुजारती है जो कि पहली बार तलाक कहते ही शुरू हो जाती है।

तलाक के दोनों ही प्रकार में पति पत्नी के बीच सुलह की गुंजाइश होती है। दोनों परिवारों के मध्यस्थ उनके बीच सुलह कराने की कोशिश करते हैं। जबकि तलाक बिद्दत में ऐसा नहीं था। उसमें एक साथ तीन बार तलाक कहते ही तत्काल प्रभाव से दोनों के बीच पति पत्नी का रिश्ता खत्म हो जाता था। कुरान और हदीस में तलाक अहसन और तलाक हसन ही तलाक के यही मान्य तरीके हैं। वैसे तलाक बिद्दत को सुन्नियों के हनफी पंथ में मान्यता थी। भारत में ज्यादातर मुसलमान सुन्नी हैं जो कि हनफी पंथ को मानते हैं। इस पंथ को मानने वालों की दलील थी कि तलाक ए बिद्दत एक प्रकार से पाप के समान है लेकिन फिर भी ये वैध है। सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज कर दिया है।

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Posted By: Gunateet Ojha