नई दिल्ली (जेएनएन)। ग्लोबल वार्मिंग से पिघलती बर्फ के कारण समुद्र का जलस्तर इस सदी के अंत यानी 2100 तक वैज्ञानिकों के पूर्वानुमान से दोगुने से भी अधिक बढ़ सकता है। यह आशंका यूनिवर्सिटी ऑफ कोलोराडो के शोधकर्ताओं ने जताई है। सोमवार को प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज में प्रकाशित शोध के अनुसार पहले 2100 तक समुद्र का जल स्तर 30 सेमी बढ़ने की आशंका थी। लेकिन अब यह 65 सेमी से भी अधिक बढ़ सकता है। इससे कई तटीय क्षेत्रों के डूबने या बाढ़ की आशंका भी बढ़ जाएगी।

चौंकाने वाली वृद्धि दर्ज

शोधकर्ताओं के अनुसार समुद्र का जलस्तर प्रति वर्ष 0.08 मिमी की दर से बढ़ रहा है। ऐसी स्थिति के अनुसार समुद्र जलस्तर 2100 तक प्रति वर्ष दस मिमी या इससे अधिक मात्रा के हिसाब से बढ़ सकता है। इसमें अल नीनो द्वारा समुद्री जल का तापमान बढ़ने और हवाओं के बदले रुख को भी जिम्मेदार बताया जा रहा है।

उपग्रहों की मदद से संभव हुआ शोध

शोधकर्ताओं ने 1993 से अब तक के समुद्र के जलस्तर के आंकड़ों का अध्ययन किया। इसके लिए उन्होंने अमेरिकी/यूरोपीय टोपेक्स/पोसीडन उपग्रह और अमेरिकी उपग्रहों जेसन-1, जेसन-2 व जेसन-3 की मदद ली। साथ ही अल नीनो के दक्षिणी बदलावों को मापने के लिए ज्वालामुखी के प्रभावों और अन्य प्रभावों का अध्ययन जलवायु संबंधी मॉडलों पर किया। इससे समुद्र जलस्तर में होने वाले पिछले 25 साल के बदलावों की जानकारी मिली।

दो बड़ी वजहें

ग्रीनहाउस गैसों के उत्सर्जन की बढ़ती मात्रा के कारण धरती पर हवा और पानी का तापमान बढ़ रहा है। इस कारण समुद्री जलस्तर दो तरह से बढ़ रहा है।

- पहला, इससे गर्म समुद्री जल तेजी से फैल रहा है। पिछले 25 साल में समुद्री जलस्तर सात सेमी बढ़ा। इसमें इस कारक की हिस्सेदारी करीब आधी है।

- दूसरा, जमीनी बर्फ के तेजी से पिघलने से समुद्री जल स्तर में लगातार बढ़ोतरी हो रही है।

अंटार्कटिका व ग्रीनलैंड में स्थिति गंभीर

शोध के मुताबिक समुद्री जलस्तर तेजी से बढ़ने के पीछे सबसे बड़ी वजह ग्रीनलैंड और अंटार्कटिका की बर्फ का तेजी से पिघलना है। अगर यह प्रक्रिया ऐसे ही जारी रही तो 2100 तक समुद्री जलस्तर दोगुना से भी अधिक करीब 65 सेमी बढ़ जाएगा। इन दोनों ही इलाकों में बर्फ के पिघलने की गणना खासतौर पर अमेरिका के ग्रेस उपग्रह से की गई।

डूब जाएंगे तटीय क्षेत्र

अगर 2100 तक समुद्री जलस्तर में 65 सेमी की वृद्धि हुई तो शंघाई, मियामी, वाशिंगटन, मुंबई जैसे प्रमुख शहरों में बाढ़ की समस्या होगी। साथ ही तटीय क्षेत्रों में बसे बांग्लादेश, श्रीलंका जैसे देश भी बाढ़ का शिकार होंगे। इनका बड़ा हिस्सा पानी में डूब जाएगा। 

Posted By: Sanjay Pokhriyal