नई दिल्ली [जागरण स्पेशल]। भारत सहित दुनिया के कई देश आज भी मलेरिया से बुरी तरह पीड़ित हैं। इस रोग के कारक मच्छरों की रोकथाम के लिए अब तक हुए उपाय बहुत कारगर नहीं साबित हो पा रहे हैं। इसी क्रम में वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खास मच्छरदानी विकसित की है, जिससे इसके रोकथाम में प्रभावी मदद मिलेगी। अंतरराष्ट्रीय जर्नल लैंसेट में छपे इस अध्ययन के मुताबिक पश्चिम अफ्रीका के बुरकिना फासो देश में इसके दो साल तक हुए क्लीनिकल परीक्षण के बेहद चौंकाने वाले नतीजे आए हैं।

ये हैं लक्षण

मलेरिया मच्छर से होने वाला संक्रामक रोग है। यह मादा एनाफिलीज मच्छर के काटने से होता है। रोगी को बुखार, उल्टी, थकान और सिरदर्द की शिकायत होती है। इसके लक्षण मच्छर काटने के 10 से 15 दिन में दिखाई पड़ने लगते हैं।

सफल रहा परीक्षण

बुरकिना फासो के 91 गांवों में हुए परीक्षण में यह पाया गया कि 12 फीसद तक मलेरिया के मामलों में कमी आई है। यहां हर साल मलेरिया के लगभग 10 लाख मामले दर्ज किए जाते हैं।

खास है मच्छरदानी

पाइरेथ्रॉयड और पाइरीप्रोक्सीफेन जैसे कीटनाशाकों से लैस इस मच्छरदानी के चपेट में आने से मच्छरों की मौत हो जाती है और इनकी प्रजनन क्षमता कम हो जाती है।

गंभीर चिंता

एक रिपोर्ट के मुताबिक 2016 में मलेरिया ने वैश्विक स्तर 21.60 करोड़ लोगों को प्रभावित किया, जो कि पिछले साल की तुलना में 5 लाख ज्यादा है।

कहां खड़ा है भारत

मलेरिया से होने वाली मौतों के मामले में भारत दुनिया में चौथे स्थान पर है। विश्व स्वास्थ्य संगठन की 2017 की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया में मलेरिया से होने वाली कुल मौतों का सात फीसद यहीं होती हैं। इसके अलावा नाइजीरिया पहले, रिपब्लिक ऑफ कांगो दूसरे बुरकिना फासो चौथे स्थान पर हैं।  

By Sanjay Pokhriyal