जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। कोरोना की दूसरी लहर कम होने के बाद भले ही कुछ राज्यों ने नौवीं से लेकर 12वीं कक्षा तक के लिए स्कूलों को धीरे-धीरे खोलने का एलान किया हो, लेकिन आइसीएमआर ने उच्चतर शिक्षा के बजाय प्राथमिक कक्षाओं में पढ़ाई पहले शुरू करने की सलाह दी है। आइसीएमआर के महानिदेशक बलराम भार्गव चौथे सीरो सर्वे का हवाला देते हुए कहा कि बड़ों की तुलना में बच्चों पर कोरोना का प्रभाव कम पड़ता है।

उच्चतर कक्षाओं के बजाय प्राथमिक कक्षाओं को पहले शुरू करने की वैज्ञानिक वजह बताते हुए डाक्टर बलराम भार्गव ने कहा कि कोरोना वायरस जिस एस रिसेप्टर के सहारे शरीर की कोशिकाओं से जुड़ता है, वह बच्चों में कम होता है।इसीलिए संक्रमित होने के बावजूद बच्चों पर उसका प्रतिकूल असर कम दिखता है। उन्होंने कहा कि चौथे सीरो सर्वे की रिपोर्ट से भी यह साबित होता है। उन्होंने कहा कि सीरो सर्वे में छह से नौ साल के 57.2 फीसद बच्चों में और 10 से 17 साल के 61.7 फीसद बच्चों में कोरोना की एंटीबाडी पाई गई है, जो लगभग उतनी ही है, जितनी बिना वैक्सीन लिए 18 साल से अधिक उम्र के लोगों मिली है। लेकिन गंभीर रूप से बीमार होने वालों में 18 साल से कम उम्र वालों की संख्या नगण्य है।

डाक्टर बलराम भार्गव ने कहा कि कोरोना की पहली लहर से लेकर तीसरी लहर तक यूरोप के कई देशों, जिसने स्कैंडिनेवियाई देश भी शामिल हैं, ने प्राथमिक स्कूलों को बंद नहीं किया और वहां लगातार कक्षाएं चलती रहीं। भारत में प्राथमिक कक्षाओं को पहले शुरू करने की सलाह देते हुए उन्होंने शिक्षकों समेत सभी स्टाफ को वैक्सीन का दोनों डोज अनिवार्य रूप से देने को कहा। इसके साथ ही उन्होंने स्कूलों और बच्चों को ले जाने वाली बसों में कोरोना प्रोटोकाल का कड़ाई से पालन करने की सलाह दी।

सभी टीचर औऱ स्टाफ का वैक्सीनेशन जरूरी

उन्होंने कहा कि इसके बाद फिर सेकंडरी स्कूल खोले जा सकते हैं। मगर यह देखना जरूरी है कि अध्यापक से लेकर सभी स्टाफ को कोरोना का टीका लगा हो। हालांकि यह फैसला जिला और राज्य स्तर पर लिया जाएगा। यह कई फैक्टर पर निर्भर होगा। स्कूल से जुड़े सभी लोगों को वैक्सीन लगाना सुनिश्चत करना होगा, वहां टेस्ट पॉजिटिविटी रेट क्या है और पब्लिक हेल्थ सिचुएशन क्या है, इसपर भी ध्यान देना होगा।

कम संक्रमण वाले एरिया में खोले जा सकते हैं स्कूल: गुलेरिया

सोमवार को एम्स के डायरेक्टर डॉ. रणदीप गुलेरिया ने भी सलाह दी थी कि जिन जिलों में कोरोना का संक्रमण कम हो गया है, वहां पर अलग-अलग चरणों में स्कूल खोले जा सकते हैं। डॉ. गुलेरिया ने कहा था कि 5 फीसद से कम संक्रमण दर वाले जिलों में स्कूलों को खोलने की योजना बनाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि बच्चों को स्कूलों में लाने का विकल्प तलाशना चाहिए। उनका कहना था कि बच्चों ने भी इस वायरस के खिलाफ अच्छी इम्युनिटी हासिल कर ली है।

इन राज्यों में खुल गए हैं स्कूल

कोरोना के मामलों में कमी को देखते हुए कई राज्यों में सुरक्षा के साथ स्कूल खोल दिए गए है। इन राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, पंजाब, बिहार, कर्नाटक व हिमाचल प्रदेश शामिल है। हालांकि स्टूडेंट्स की सुरक्षा के लिए स्कूलों में कोविड प्रोटोकॉल का पालन किया जा रहा है। इसके लिए पैरेंट्स की सहमति जरूरी और ऑनलाइन क्लासेस भी चलती रहेंगी।

इन राज्यों में जल्द ही स्कूल खोले जाने की तैयारी

वहीं कुछ ऐसे राज्य हैं जहां स्कूल खोलने की तैयारी चल रही है। इसमें मध्यप्रदेश, ओडिशा, आंध्रप्रदेश शामिल है। मप्र में स्कूल और कॉलेज दोनों आधी कैपेसिटी के साथ ही खोले जाएंगे। स्टूडेंट्स को दो बैच में बांटा जाएगा और हर बैच को एक दिन छोड़कर स्कूल आना होगा। यानी स्टूडेंट्स का एक बैच पहले दिन और दूसरा बैच अगले दिन कक्षाओं में शामिल होगा। ओडिशा में स्टूडेंट्स के लिए ऑनलाइन क्लासेस भी जारी रहेंगी और स्कूल आना ऐच्छिक होगा।

राजस्थान, यूपी, दिल्ली में अभी नहीं हुआ स्कूल खोलने पर कोई फैसला

वहीं कोरोना की तीसरी लहर की आशंका को देखते हुए कई राज्य अभी स्कूल खोलने के पक्ष में नहीं है। इसमें राजस्थान, यूपी, दिल्ली प्रमुख है। इसके साथ ही छत्तीसगढ़, झारखंड, उत्तराखंड, तमिलनाडु, नगालैंड, अरुणाचल प्रदेश, असम, पश्चिम बंगाल, पुडुचेरी में भी अभी स्कूल बंद हैं। यूपी में 1 जुलाई से टीचर्स और बाकी स्टाफ के लिए स्कूल खुल गए हैं, लेकिन स्टूडेंट्स को फिलहाल ऑनलाइन ही पढ़ाई करनी होगी। राज्य में स्कूल कब तक खुलेंगे इसको लेकर फिलहाल कोई फैसला नहीं हुआ है।