नई दिल्ली, जागरण ब्यूरो। कोरोना संकटकाल के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई भले ही एक विकल्प के रूप में शुरू की गई, लेकिन सरकार अब इसे एक नया आधार देगी। इसके लिए शैक्षणिक संस्थानों में मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा। खासकर स्कूलों में इससे जुड़ी मुहिम को और तेज किया जाएगा। इसके तहत स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर जुटाया जाएगा। इनमें बिजली, कंप्यूटर और इंटरनेट जैसी सुविधाएं अहम होंगी। स्कूलों में इस मुहिम को तेज करने की योजना इसलिए भी बनाई गई है, क्योंकि मौजूदा समय में देश के ज्यादातर स्कूलों के पास ऑनलाइन पढ़ाई को लेकर कोई इंफ्रास्ट्रक्चर ही नहीं है।

यूनिफाइड डिस्ट्रिक इन इनफॉरमेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन (UDISE) की एक रिपोर्ट के मुताबिक देश के सिर्फ डेढ़ लाख सरकारी स्कूलों के पास ही इंटरनेट की सुविधा है। वहीं कम्प्यूटर सिर्फ तीन लाख स्कूलों के पास है। इससे भी बड़ी बात यह है कि देश के करीब ढाई लाख सरकारी स्कूल ऐसे हैं, जहां अब तक बिजली नहीं है। देश में वैसे तो मौजूदा समय में पंद्रह लाख से ज्यादा स्कूल हैं, जिनमें दस लाख से ज्यादा सरकारी स्कूल हैं।

ऑनलाइन इंफ्रास्ट्रक्चर को दी जा सकेगी मजबूती

खास बात यह है कि निजी स्कूलों की स्थिति भी इस मामले में बहुत अच्छी नहीं है। यह बात अलग है कि सरकारी स्कूलों के मुकाबले इनकी स्थिति थोड़ी बेहतर है। बहरहाल, ऑनलाइन पढ़ाई से जुड़ी इन समस्याओं को दूर करने की योजना पर सरकार अब मजबूती से काम कर रही है। ताकि कोरोना जैसी किसी नई चुनौती के आने पर उसका डटकर मुकाबला कर सके। राज्यों से इसे लेकर विस्तृत प्रस्ताव मांगे गए हैं, जिससे ऑनलाइन से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूती दी जा सके।

इसके साथ ही शिक्षकों के प्रशिक्षण की भी पूरी रिपोर्ट मांगी गई है। वैसे भी शिक्षकों को ऑनलाइन से जुड़े प्रशिक्षण देने को लेकर निष्ठा सहित कई प्रोग्राम चलाए जा रहे हैं। आने वाले नए वित्तीय वर्ष से पहले शिक्षा मंत्रालय की इस कवायद को काफी अहम माना जा रहा है। वैसे भी मंत्रालय ने साफ कर दिया है कि ऑनलाइन पढ़ाई आगे भी जारी रहेगी। साथ ही तीस फीसद पाठ्यक्रम ऑनलाइन पढ़ाया जाएगा।

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