'दिव्यांगों के अनुकूल नियमों को सशक्त बनाने पर विचार करे केंद्र', सुप्रीम कोर्ट का सुझाव
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को दिव्यांग व्यक्तियों के लिए सुलभता नियमों को सशक्त बनाने हेतु विशेषज्ञों के सुझावों पर गंभीरता से विचार करने का निर्देश दिया है।
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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को सुझावों पर विचार करने को कहा

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिव्यांग व्यक्तियों के आवागमन को सुलभ और सहज बनाने की दिशा में सुधार के उद्देश्य से केंद्र से विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर गंभीरता से विचार करने को कहा है। ताकि ऐसे लोगों के लिए सार्वजनिक स्थानों व सेवाओं तक आसान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए बिना खामियों के ठोस नियम बनाए जा सकें।
जस्टिस जेबी पार्डीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने नियमों के निर्माण पर प्रस्तुतियों का संज्ञान लिया और केंद्र की ओर से उपस्थित अतिरिक्त सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी से कहा कि वे ड्राफ्ट नियमों को गजट में अधिसूचित करने से पहले विशेषज्ञों और याचिकाकर्ताओं के सुझावों पर विचार करें, ताकि उन्हें अधिक सशक्त, त्रुटिहीन व कार्यान्वयन योग्य बनाया जा सके।
पीठ ने कहा, 'याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि ड्राफ्ट नियमों को अंतिम रूप देने और आधिकारिक गजट में प्रकाशित करने से पहले उनके सुझावों पर विचार किया जाए, ताकि कोई खामी या कमी न रह जाए और यह (आरपीडब्ल्यूडी) अधिनियम के प्रविधानों को कानून के उद्देश्य को पूरा करने को अधिक प्रभावी बनाए।'
शीर्ष अदालत ने यह भी गंभीरता से लिया कि दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान, हिमाचल, कर्नाटक, अंडमान-निकोबार और तमिलनाडु सहित ग्यारह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम के तहत दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास की निगरानी के लिए राज्य आयुक्तों की नियुक्ति नहीं की है।
पीठ ने कहा कि किसी भी चूक को गंभीरता से लिया जाएगा। इसलिए सभी राज्यों को निर्देश दिया कि वे आरपीडब्ल्यूडी अधिनियम की धारा 79 के तहत चार सप्ताह के भीतर राज्य आयुक्तों की नियुक्ति करें। यह निर्देश सख्ती से पालन किया जाएगा और कोई राज्य किसी प्रकार की ढिलाई नहीं दिखा सकता।
पीठ ने केंद्र को यह भी निर्देश दिया कि वह कानून के तहत मुख्य आयुक्त की सहायता के लिए चार सप्ताह के भीतर दो आयुक्तों की नियुक्ति करे, ताकि दिव्यांग व्यक्तियों के पुनर्वास को सुनिश्चित किया जा सके। पीठ ने अब 2025 में राजीव रतूरी द्वारा दायर जनहित याचिका की सुनवाई अगले वर्ष जनवरी में निर्धारित की है।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
