नई दिल्‍ली, एजेंसी। आधार कार्ड की अनिवार्यता पर आज फिर सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संवैधानिक पीठ सुनवाई करेगी। आधार मामले में मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम सवाल उठाते हुए पूछा था कि क्या सरकार का यह चिंता करना वाजिब नहीं है कि सामाजिक कल्याण की योजनाओं का लाभ सही व्यक्ति तक पहुंचे या लाभांवित व्यक्ति जिंदा है भी या नहीं।

प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की संवैधानिक पीठ ने यह सवाल आधार को चुनौती देने वालों की ओर से पेश वरिष्ठ वकील श्याम दीवान की दलीलों पर उठाया। दीवान का कहना था कि यह चिंता सभी नागरिकों के निजी और बायोमीट्रिक ब्योरे के एकत्रीकरण को जायज नहीं ठहरा सकती। चूंकि इससे उनकी प्रोफाइलिंग और निगरानी की जा सके।

पीठ ने कहा, 'ऐसा लगता है कि वह (केंद्र और राज्य सरकार) आधार का इस्तेमाल सामाजिक कल्याण की योजनाओं के लिए कर रहे हैं, लेकिन आप (वकील) बता रहे हैं कि इसका इस्तेमाल प्रोफाइलिंग के लिए किया जा रहा है।'

पीठ ने सरकार के उस जवाब का भी हवाला दिया कि वह आधार के इस्तेमाल से मनरेगा, रसोई गैस सब्सिडी आदि योजनाओं में डीबीटी के जरिए बचत कर रही। ऐसे में जानकारी जुटाना समाज कल्याण योजनाओं का लाभ सुनिश्चित करने के लिए है। 

इससे पहले 23 जनवरी को हुई सुनवाई में श्‍याम दीवान ने सुप्रीम कोर्ट में जानकारी दी थी कि सरकार धारा 48 के तहत आपातकालीन स्थिति में सभी रिकॉर्ड पर नियंत्रण कर सकती है। उन्‍होंने यह भी जानकारी दी कि धारा 51 और 57 के तहत आधार की अनिवार्यता पर बहस हो सकती है। वहीं 18 जनवरी को हुई सुनवाई में श्‍याम दीवान ने संवैधानिक पीठ के समक्ष आधार से जुड़े तीन मुद्दे उठाए थे, जिनमें सूचना की अखंडता और मौलिक अधिकारों के व्यापक उल्लंघन शामिल थे।

Edited By: Pratibha Kumari