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'मंत्री जी पर केस चलेगा या नहीं'? कर्नल सोफिया कुरैशी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार से पूछा सवाल

Published: Mon, 19 Jan 2026 05:22 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मंत्री कुंवर विजय ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को दो हफ्ते में निर्णय लेने का निर्देश।

सुप्रीम कोर्ट ने MP सरकार को दो हफ्ते में निर्णय लेने का निर्देश।

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को मध्य प्रदेश सरकार को एक अहम निर्देश दिया है। टॉप कोर्ट कहा कि वह कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियों के लिए राज्य मंत्री कुंवर विजय शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी देने पर दो हफ्ते के अंदर फैसला ले।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस दीपांकर दत्ता और जॉयमाल्य बागची की बेंच ने कहा कि कोर्ट द्वारा नियुक्त स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) ने अपनी जांच पूरी कर ली है और अपनी फाइनल रिपोर्ट जमा कर दी है।

लेकिन, भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 196 के तहत राज्य सरकार से अनिवार्य मंजूरी न मिलने के कारण आगे की कार्यवाही रुकी हुई है। ये मामला सांप्रदायिक नफरत और दुर्भावना को बढ़ावा देने वाले अपराधों से संबंधित है।

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SC ने MP सरकार को दो हफ्ते में निर्णय लेने का निर्देश

सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस ने राज्य सरकार से कहा, 'आप 19 अगस्त, 2025 से SIT रिपोर्ट को लेकर बैठे हैं। कानून आप पर एक जिम्मेदारी डालता है और आपको फैसला लेना होगा।

अब 19 जनवरी, 2026 है।' बेंच ने SIT की सीलबंद रिपोर्ट खोली और पढ़ी, जिसमें दर्ज था कि जांच पैनल ने मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच करने के बाद शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी मांगी थी। 'हमें बताया गया है कि जब से यह मामला यहां लंबित है, राज्य सरकार ने कोई कार्रवाई नहीं की है।'

कोर्ट ने आदेश दिया, 'हम मध्य प्रदेश राज्य को कानून के हिसाब से मंज़ूरी के लिए उचित कदम उठाने का निर्देश देते हैं।' राज्य सरकार की ओर से पेश वकील ने कहा कि कोई फैसला नहीं लिया गया क्योंकि मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग था।

इस सफाई को खारिज करते हुए बेंच ने कहा, 'जांच पूरी हो गई है। अब राज्य को फैसला लेना होगा,' और निर्देश दिया कि इस मुद्दे पर दो हफ्ते के अंदर फैसला लिया जाए और कंप्लायंस रिपोर्ट दाखिल की जाए।

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मंत्री शाह पर मुकदमा चलाने की मंजूरी का मामला

कोर्ट ने SIT द्वारा कुछ अन्य कथित मामलों का भी संज्ञान लिया, जिनमें शाह पर आपत्तिजनक टिप्पणी करने का आरोप है। कोर्ट ने SIT को उन मुद्दों की अलग से जांच करने और उन बयानों पर प्रस्तावित कार्रवाई का ब्यौरा देते हुए एक स्वतंत्र रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया।

मंत्री के व्यवहार की निंदा करते हुए CJI ने कहा कि माफी मांगने में 'बहुत देर हो गई है'। हमने पहले ही टिप्पणी की थी कि किस तरह की माफी मांगी गई थी। 2

8 जुलाई, 2025 को, सुप्रीम कोर्ट ने शाह को सार्वजनिक माफी रिकॉर्ड पर न रखने के लिए फटकार लगाई थी, यह देखते हुए कि वह 'कोर्ट के सब्र का इम्तिहान ले रहे थे' और उनके इरादों और नेकनीयती' पर संदेह पैदा कर रहे थे।

जब शाह के वकील ने तर्क दिया कि माफी ऑनलाइन जारी की गई थी, तो कोर्ट ने जवाब दिया, 'ऑनलाइन माफी क्या होती है? हमें उनके इरादों और नेकनीयती पर संदेह होने लगा है। आप माफी को रिकॉर्ड पर रखें। हमें इसे देखना होगा।'

कर्नल सोफिया कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी से जुड़ा विवाद

इससे पहले, पिछले साल 28 मई को, सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश हाई कोर्ट में कार्यवाही बंद करने का आदेश दिया था। SIT से स्टेटस रिपोर्ट मांगी थी, जिसका गठन शाह की टिप्पणियों और उसके खिलाफ दर्ज FIR पर कोर्ट द्वारा आपत्ति जताने के बाद किया गया था।

शाह तब जांच के दायरे में आए जब एक वायरल वीडियो में कथित तौर पर उन्हें कर्नल कुरैशी के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करते हुए दिखाया गया था, जो ऑपरेशन सिंदूर पर आधिकारिक मीडिया ब्रीफिंग के दौरान विंग कमांडर व्योमिका सिंह के साथ राष्ट्रीय स्तर पर सुर्खियों में आए थे।

मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने शाह को 'गटर की भाषा' इस्तेमाल करने और 'अपमानजनक' टिप्पणी करने के लिए फटकार लगाई थी।