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पेट्रोल में कितना एथनॉल? पंपों पर जानकारी अनिवार्य करने की मांग पर सोमवार को 'सुप्रीम' सुनवाई

Published: Sat, 29 Aug 2026 06:41 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट सोमवार को पेट्रोल में एथनॉल मिश्रण की जानकारी अनिवार्य करने वाली याचिका पर सुनवाई करेगा।

पेट्रोल में कितना एथनॉल।

पेट्रोल में कितना एथनॉल।

HighLights

  1. पेट्रोल पंपों पर एथनॉल मिश्रण प्रतिशत की जानकारी अनिवार्य हो।

  2. ईंधन रसीदों पर एथनॉल मिश्रण का प्रतिशत स्पष्ट मुद्रित हो।

  3. वाहन संगतता डेटाबेस बने, विशेषज्ञ समिति का गठन हो।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। पर्यावरण संरक्षण और हरित ऊर्जा की दिशा में उठाए जा रहे कदम अपनी जगह महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसके साथ ही देश के आम वाहन चालकों और कार मालिकों के अधिकारों व हितों की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है।

देश में पेट्रोल के साथ एथनॉल के बढ़ते मिश्रण (विशेषकर ई20) को लेकर अब सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया गया है। यह मामला सिर्फ ईंधन से जुड़ा नहीं है, बल्कि हर उस नागरिक की जिज्ञासा और सुरक्षा का है जो अपनी मेहनत की कमाई से वाहन खरीदता है और सड़क पर उतरता है।

नरेन्द्र कुमार गोस्वामी द्वारा दायर याचिका पर सोमवार (31 अगस्त) को सुप्रीम कोर्ट की पीठ - जिसमें जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस प्रसन्ना बी. वराले शामिल हैं - सुनवाई करेगी। इस याचिका का मुख्य उद्देश्य पेट्रोल पंपों पर पारदर्शिता लाना और उपभोक्ताओं को उनके वाहन के लिए सही ईंधन चुनने की पूरी आजादी देना है।

पारदर्शिता की दरकार : नोजल और रसीद पर हो एथनॉल का स्पष्ट जिक्र आज के समय में वाहन चालकों के मन में सबसे बड़ा असमंजस यह है कि वे अपनी गाड़ी में जो पेट्रोल डलवा रहे हैं, उसमें एथनॉल की सटीक मात्रा कितनी है।

याचिका में मांग की गई है कि देश के हर पेट्रोल पंप पर ईंधन वितरण करने वाले हर डिस्पेंसिंग नोजल पर अनिवार्य और स्पष्ट रूप से यह प्रदर्शित किया जाए कि पेट्रोल में एथनॉल का कितना प्रतिशत मिला हुआ है।

इतना ही नहीं, याचिका में यह भी आग्रह किया गया है कि वाहन चालकों को मिलने वाली हर ईंधन रसीद (इनवॉयस) पर भी इस मिश्रण का प्रतिशत साफ-साफ शब्दों में मुद्रित होना चाहिए। इससे वाहन मालिक यह भली-भांति जान सकेंगे कि वे अपनी गाड़ी में किस प्रकार का ईंधन इस्तेमाल कर रहे हैं।

बढ़ते मिश्रण से वाहन की उम्र व इंजन सुरक्षा पर मंडराते सवाल

एथनॉल के बढ़ते मिश्रण से पुराने या गैर-संगत वाहनों के इंजनों पर पड़ने वाले असर को लेकर वाहन मालिकों में गहरी चिंता है। इसी को ध्यान में रखते हुए याचिका में कई महत्वपूर्ण और व्यावहारिक मांगें रखी गई हैं।

सार्वजनिक डाटाबेस: केंद्र सरकार और संबंधित विभागों को निर्देश दिए जाएं कि वे वाहन निर्माता, माडल, इंजन के प्रकार और निर्माण वर्ष के आधार पर एक सुलभ ऑनलाइन डाटाबेस तैयार करें, जिससे यह पता चल सके कि कौन सा वाहन किस एथनॉल मिश्रण के लिए उपयुक्त है।

विशेषज्ञ समिति का गठन: पेट्रोलियम, सड़क परिवहन, भारतीय मानक ब्यूरो (बीआइएस) के प्रतिनिधियों और स्वतंत्र ऑटोमोबाइल इंजीनियरों की एक निष्पक्ष समिति बने। यह समिति इंजन की उम्र, रखरखाव लागत, ईंधन दक्षता और पर्यावरण पर पड़ने वाले वास्तविक प्रभावों का अध्ययन कर रिपोर्ट सौंपे।

राष्ट्रीय उपभोक्ता प्रोटोकाल: केंद्रीय उपभोक्ता संरक्षण प्राधिकरण के साथ मिलकर एक पारदर्शी नीति तैयार की जाए, ताकि उपभोक्ताओं/ग्राहकों के हितों की पूरी रक्षा हो सके। यह कानूनी पहल वाहन चालकों को जागरूक और सुरक्षित रखने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)