सुप्रीम कोर्ट ने तीन बच्चियों के दुष्कर्मी की फांसी पर क्यों लगाई रोक? ट्रायल और हाई कोर्ट से मांगी रिपोर्ट
सुप्रीम कोर्ट ने छह से आठ वर्ष की तीन बच्चियों का बार-बार दुष्कर्म करने वाले एक व्यक्ति की फांसी की ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्मी की फांसी की सजा पर रोक लगाई(फोटो- ANI)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने दुष्कर्मी की फांसी की सजा पर रोक लगाई।
हाई कोर्ट के फैसले को स्थगित कर सुनवाई 20 सप्ताह बाद।
ट्रायल कोर्ट, हाई कोर्ट और अन्य से रिपोर्ट तलब की।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने छह से आठ वर्ष की तीन बच्चियों का बार-बार दुष्कर्म करने वाले एक व्यक्ति की फांसी की सजा पर रोक लगा दी है। पीठ ने हाई कोर्ट के फैसले को स्थगित करते हुए मामले की सुनवाई 20 सप्ताह बाद निर्धारित की है।
जस्टिस विक्रम नाथ, आगस्टिन जार्ज मसीह और संदीप मेहता की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह आदेश पारित किया, जिसमें उसने इस वर्ष जून में मद्रास हाई कोर्ट की मदुरै पीठ के फैसले को चुनौती दी थी, जिसने उसके दोष और मृत्युदंड की पुष्टि की थी।
हाई कोर्ट ने कहा था कि तीन नन्हीं बच्चियों को एक वर्ष की अवधि में बार-बार दुष्कर्म का शिकार होना पड़ा और उनकी आयु क्रमशः छह, सात और आठ वर्ष थी। अदालत ने कहा था कि दोषी को किसी भी प्रकार की छूट नहीं मिलनी चाहिए।
हाई कोर्ट ने कहा था, 'जिस आरोपित ने तीन बच्चों की आत्मा व गरिमा को नष्ट किया वह समाज में रहने योग्य नहीं और उसके घृणित अपराध के लिए उसे अपनी जान गंवानी होगी।" लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने 21 सितंबर के आदेश में कहा,"मृत्युदंड का कार्यान्वयन वर्तमान अपीलों की सुनवाई और अंतिम निपटान तक स्थगित रहेगा।'
पीठ ने कहा कि मामले का मूल रिकार्ड ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट से मंगवाया जाए। तमिलनाडु को निर्देश दिया कि वह 16 सप्ताह में अपीलकर्ता से संबंधित प्रोबेशन अधिकारियों की रिपोर्ट शीर्ष न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करे। पीठ ने कहा कि पलयमकोट्टाई केंद्रीय जेल के जेल अधीक्षक को अपीलकर्ता द्वारा जेल में किए गए कार्यों और वहां उसके आचरण के संबंध में रिपोर्ट देनी होगी।
तिरुनेलवेली मेडिकल कालेज के प्रमुख को अपीलकर्ता का मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन करने के लिए उपयुक्त टीम गठित कर रिपोर्ट 16 सप्ताह में देनी होगी। ज्ञात हो कि इस वर्ष मार्च में ट्रायल कोर्ट ने अपीलकर्ता को दोषी ठहरा कर मृत्युदंड सुनाया।
हाई कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के आदेश को बरकरार रख अपील खारिज की। अभियोजन पक्ष के अनुसार दोषी तीन नाबालिगों का पड़ोसी था, जिनके माता-पिता दिहाड़ी मजदूर हैं। दोषी इन तीन बच्चों को घर में ले जाकर दुष्कर्म करता था। ये घटनाएं एक वर्ष चलीं।
न्यूज एजेंसी PTI से मिले इनपुट के अनुसार
