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'ममता बनर्जी ने लोकतंत्र को खतरे में डाला', I-PAC मामले में मुख्यमंत्री को सुप्रीम कोर्ट की फटकार

Published: Wed, 22 Apr 2026 04:25 PM (IST)Updated: Wed, 22 Apr 2026 06:24 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन अभियान के दौरान न्यायिक अधिकारियों के कथित घेराव और उन्हें बंधक बनाने की घटना की कड़ी निंदा की है।

ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार। (फाइल)

ममता बनर्जी को सुप्रीम कोर्ट की फटकार। (फाइल)

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के दौरान अभियान में तैनात न्यायिक अधिकारियों के कथित घेराव और उन्हें बंधक बनाए जाने के मामले की कड़ी निंदा की है। 

चुनावी राज्य की मौजूदा सामाजिक-राजनीतिक वास्तविकताओं को 'एक असाधारण स्थिति' बताते हुए, जस्टिस पीके मिश्रा और जस्टिस एनवी अंजारिया की पीठ ने पश्चिम बंगाल प्रशासन, जिसमें मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, की ओर से बहस कर रहे वकील से कहा कि वे भले ही अमूर्त कानूनी सिद्धांतों पर बहस करें, लेकिन अदालत राज्य में चल रही व्यावहारिक वास्तविकताओं से अपनी आंखें नहीं फेर सकती।

बंगाल की व्यावहारिक वास्तविकताओं नजरअंदाज नहीं कर सकते- सुप्रीम कोर्ट

अदालत ने टिप्पणी की, 'यह एक असाधारण स्थिति है। दूसरी पीठ के सामने, हमने देखा कि कई न्यायिक अधिकारियों को बंधक बनाकर रखा गया था। हम वास्तविकताओं से अपनी आंखें नहीं फेर सकते। आप भले ही अमूर्त कानूनी सिद्धांतों पर बहस करें, लेकिन हम राज्य में उत्पन्न हो रही व्यावहारिक स्थिति को नजरअंदाज नहीं कर सकते।' अदालत ने इस मामले की सुनवाई कल के लिए तय की है।

मुख्यमंत्री ने लोकतंत्र को खतरे में डाला- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कोलकाता I-PAC रेड केस में ED की जांच में कथित दखल पर गहरी चिंता जताई है। सुनवाई को दौरान, अदालत ने केंद्रीय एजेंसी द्वारा की जा रही जांच के बीच मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के कथित हस्तक्षेप को भी गलत ठहराया और कहा कि किसी राज्य की सीएम द्वारा किया गया यह कृत्य लोकतंत्र को खतरे में डालता है।

अदालत ने टिप्पणी की, 'यह राज्य और केंद्र के बीच का विवाद नहीं है। हमने कभी नहीं सोचा था कि इस देश में ऐसा भी दिन आएगा, जब कोई मौजूदा सीएम उस दफ्तर में घुस जाएगी, जहां कोई जांच एजेंसी काम कर रही हो।'

अदालत ने आगे कहा 'किसी भी राज्य की मुख्यमंत्री जांच के बीच में इस तरह दफ्तर में घुसकर लोकतंत्र को खतरे में नहीं डाल सकतीं और फिर यह नहीं कह सकतीं कि इसे राज्य और केंद्र के बीच का विवाद न बनाया जाए। यह अपने आप में एक ऐसे व्यक्ति द्वारा किया गया कृत्य है, जो संयोगवश मुख्यमंत्री है, और जो पूरे लोकतंत्र को खतरे में डाल रहा है।'

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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