डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों की लेबलिंग: सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से मांगा विस्तृत स्पष्टीकरण
सुप्रीम कोर्ट ने एफएसएसएआई से डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों पर वसा, चीनी और नमक के स्तर को दर्शाने वाले प्रस्तावित लेबल पर स्पष्टीकरण मांगा है।

FSSAI से पोषक तत्वों वाले लेबल पर सुप्रीम कोर्ट ने मांगा स्पष्टीकरण। (एएनआई)
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने FSSAI से लेबलिंग प्रस्ताव पर स्पष्टीकरण मांगा।
वसा, चीनी, नमक के स्तर दर्शाने वाले लेबल पर सवाल उठे।
स्कूलों में पोषण जागरूकता बढ़ाने की योजना भी पूछी गई।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथारिटी आफ इंडिया (एफएसएसएआइ) से कहा है कि वह डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों पर वसा, चीनी और नमक जैसे पोषक तत्वों के चिंताजनक स्तर के प्रस्तावित लेबल को लेकर और स्पष्टीकरण दे।
एफएसएसएआई ने पैकेट के अगले हिस्से पर लेबलिंग यानी फ्रंट-आफ-पैकेज लेबलिंग (एफओपीएल) को चरणों में लागू करने का प्रस्ताव दिया है। एफओपीएल खाद्य पदार्थ के पैकेट पर दी जाने वाली पोषण संबंधी जानकारी का एक ग्राफिक होता है, जो ग्राहकों को उसे खरीदने और बेहतर खान-पान के बारे में सही फैसला लेने में मदद करता है।
जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस के. विनोद चंद्रन की पीठ ने गुरुवार को केंद्र सरकार से यह भी पूछा कि वह स्कूलों में पोषण संबंधी जागरूकता कैसे बढ़ाएगी और कहा कि बच्चों में खान-पान की अस्वास्थ्यकर आदतें विकसित होने का गंभीर खतरा है।
कोर्ट के गुरुवार देर रात अपलोड किए गए आदेश के अनुसार, "इस मामले में हम केंद्र सरकार से यह जानना चाहेंगे कि स्कूल; पाठ्यक्रमों, विभिन्न पहलों और कार्यशालाओं आदि के जरिये इस बात की क्या योजना बना रहे हैं कि डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों पर दी गई जानकारी को कैसे समझा जाए और पोषण संबंधी जागरूकता से जुड़े अन्य पहलू क्या हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को होगी।
शीर्ष अदालत '3एस एंड आवर हेल्थ सोसायटी' नामक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। इस ट्रस्ट ने केंद्र, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से डिब्बा बंद खाद्य पदार्थों पर अनिवार्य रूप से एफओपीएल लागू करने का निर्देश देने की मांग की है।
एफएसएसएआई ने पिछले महीने अनुपालन हलफनामा दायर कर सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि उसने अधिक वसा, अधिक चीनी और अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थों पर लाल रंग का साफ दिखने वाला 'फ्रंट-ऑफ-पैक' चेतावनी लेबल लगाने का दो चरणों का प्रस्ताव किया है।
पहले चरण में केवल उन उत्पादों को शामिल किया जाएगा जिनमें बताए गए पोषक तत्वों में से दो या उससे अधिक पोषक तत्व अधिक मात्रा में हों और इसमें निर्दिष्ट मीठे पेय पदार्थ भी शामिल होंगे। दूसरे चरण में, यह लेबल उन उत्पादों पर भी लागू होगा जिनमें इनमें से कोई भी एक पोषक तत्व अधिक मात्रा में हो।
पीठ ने एफएसएसएआई से इन दो चरणों को लागू करने की समयसीमा के बारे में सवाल किया और कहा, "उपभोक्ता की स्वीकार्यता या उद्योगों को फार्मूला बदलने के लिए पर्याप्त समय देना ही समय की अनिश्चितता का कारण नहीं हो सकता। इसलिए एफएसएसएआई के तरीके को कारगर बनाने के लिए एक उचित, वैज्ञानिक रूप से सही और स्पष्ट रूप से परिभाषित समयसीमा बताई जानी चाहिए जो इन दो चरणों को अलग-अलग करे।"
कोर्ट ने कहा कि वह 10 दिनों के भीतर हलफनामा दाखिल कर मांगा गया स्पष्टीकरण दे। पीठ ने एफएसएसएआई से यह भी पूछा कि वह पहले चरण के तहत आने वाले निर्धारित मीठे पेय पदार्थों की पहचान कैसे करेगा और इन पेय पदार्थों के लिए संबंधित पोषक तत्वों का सीमा स्तर क्या होगा?
पीठ ने कई अन्य सवालों पर भी स्पष्टीकरण मांगा, जैसे- प्रस्तावित लेबलिंग सिस्टम का फोंट साइज; वसा, चीनी व नमक के लिए अलग-अलग चित्रात्मक निरूपण और एफओपीएल का स्थान।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
