नई दिल्ली (प्रेट्र)। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कर्नाटक की उस दलील को खारिज कर दिया, जिसमें कावेरी प्रबंधन योजना के मसौदे के लिए और समय की मांग की गई थी। इसके पीछे कर्नाटक का तर्क था कि राज्य में नई सरकार के गठन की प्रक्रिया चल रही है। अदालत ने केंद्र सरकार से कावेरी प्रबंधन योजना के मसौदे में प्रावधान को संशोधित करने के लिए कहा है। इस प्रावधान में केंद्र सरकार को चार दक्षिणी राज्यों (तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और पुडुचेरी) के बीच कावेरी जल वितरण पर समय-समय पर निर्देश जारी करने का अधिकार है।

मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल से योजना को संशोधित करने और गुरुवार को मंजूरी के लिए जमा करने के लिए कहा है। पीठ ने कर्नाटक का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील श्याम दिवान की याचिका को स्वीकार नहीं किया। याचिका में मांग की गई थी कि कावेरी योजना के मसौदे को अंतिम रूप देने के लिए जुलाई के पहले सप्ताह तक रोक लगा दी जाए, क्योंकि राज्य में सरकार गठन की प्रक्रिया चल रही है।

दिवान ने कहा कि मैं जुलाई के पहले सप्ताह तक स्थगन के लिए अनुरोध कर रहा हूं, क्योंकि सरकार गठन की प्रक्रिया के कारण मुझे कर्नाटक के मंत्रियों की परिषद से सहायता और निर्देश नहीं मिल रहे हैं। अदालत ने कर्नाटक की याचिका को खारिज करते हुए कहा कि केंद्र को मसौदा योजना स्थापित करना है। खंडपीठ ने संशोधित मसौदा योजना पर विचार करने के मामले पर कल सुनवाई करेगी।

केंद्र सरकार ने कावेरी नदी के जल बंटवारे के लिए कावेरी प्रबंधन योजना का मसौदा सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया था। चार दक्षिणी राज्यों (कर्नाटक, तमिलानाडु, केरल और पुडुचेरी) के बीच कावेरी जल बंटवारे पर चल रही कानूनी लड़ाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कावेरी प्रबंधन योजना पर मसौदा तैयार करने का निर्देश दिया था।

इससे पहले अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि कर्नाटक चुनाव प्रचार में प्रधानमंत्री और उनके मंत्रिमंडल सहयोगियों के व्यस्त रहने की वजह से योजना के मसौदे को मंजूरी देने के लिए मंत्रिमंडल की बैठक नहीं हो सकी है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र को फटकार लगाते हुए कहा था कि यह पूरी तरह से उसके निर्णय की अवमानना है।

पानी पर किसी भी राज्य का मालिकाना हक नहीं है-सुप्रीम कोर्ट

इसी साल जनवरी में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को कावेरी नदी के पानी के बंटवारे के लिए एक मैनेजमेंट बोर्ड के गठन का आदेश दिया था। कोर्ट ने फैसले में कहा था कि नदी के पानी पर किसी भी राज्य का मालिकाना हक नहीं है। सुप्रीम कोर्ट ने कावेरी जल विवाद ट्रिब्यूनल (CWDT) के फैसले के मुताबिक तमिलनाडु को जो पानी मिलना था, उसमें कटौती की गई और बेंगलुरु की जरूरतों का ध्यान रखते हुए कर्नाटक को मिलने वाले पानी की मात्रा में 14.75 टीएमसी फीट का इजाफा किया।

जानिए क्या है विवाद

भारतीय संविधान के अनुसार कावेरी एक अंतरराज्यीय नदी है। कर्नाटक और तमिलनाडु इस कावेरी घाटी में पड़ने वाले प्रमुख राज्य हैं। इस घाटी का एक हिस्सा केरल में भी पड़ता है और समुद्र में मिलने से पहले ये नदी कराइकाल से होकर गुजरती है, जो पुडुचेरी का हिस्सा है। इसलिए इस नदी के जल के बंटवारे को लेकर इन चारों राज्यों में विवाद चल रहा है।

Posted By: Arti Yadav