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भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका, पाटन चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका रद करने की मांग खारिज

Published: Mon, 28 Sep 2026 10:41 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उस याचिका में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया, जिसमें ...और पढ़ें

भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका

भूपेश बघेल को सुप्रीम कोर्ट से झटका

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने भूपेश बघेल की याचिका में हस्तक्षेप से इनकार किया।

  2. पाटन सीट पर विजय बघेल की चुनाव याचिका को चुनौती दी थी।

  3. समयसीमा पर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट साक्ष्यों के आधार पर विचार करेगा।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उस याचिका में हस्तक्षेप करने से इन्कार कर दिया, जिसमें उन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से उनकी जीत के खिलाफ भाजपा नेता विजय बघेल की चुनाव याचिका को चुनौती दी है।

भूपेश बघेल की ओर से पेश हुए वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल और विवेक तन्खा ने चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की पीठ के समक्ष दलील दी कि चुनाव को चुनौती देने वाली याचिका जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 81 के तहत निर्धारित 45 दिन की अनिवार्य समयसीमा के कारण विचार करने योग्य नहीं है।

सिब्बल ने कहा कि चुनाव के खिलाफ दाखिल याचिका को शुरुआती चरण में ही खारिज कर दिया जाना चाहिए था। उन्होंने भाजपा नेता विजय बघेल द्वारा दाखिल हलफनामे की तारीख का विशेष रूप से हवाला दिया।

सिब्बल ने कहा कि हलफनामे पर 22 जनवरी, 2024 की तारीख है, जबकि चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद 45 दिन की समयसीमा 17 जनवरी, 2024 को ही समाप्त हो गई थी।

हालांकि पीठ ने का कि तारीखों की सत्यता और उनके कानूनी प्रभाव को साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा। शीर्ष अदालत ने कहा कि मौजूदा चरण में कार्यवाही में हस्तक्षेप करने का कोई आधार नहीं है। साथ ही यह संकेत दिया कि छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट समयसीमा के मुद्दे पर कानून के अनुसार विचार कर सकता है।

यह मामला विजय बघेल की ओर से दाखिल उस चुनाव याचिका से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने 2023 के छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव में पाटन सीट से भूपेश बघेल के निर्वाचन को चुनौती दी है। (समाचार एजेंसी ANI के इनपुट के साथ)