श्रीनगर (प्रेट्र)। जम्‍मू कश्‍मीर में डीजीपी दिलबाग सिंह की नियुक्‍ति में हस्‍तक्षेप से सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इंकार कर दिया। डीजीपी पर पहले आए आदेश में सुधार की मांग वाली जम्‍मू कश्‍मीर की याचिका पर कोर्ट ने केंद्र से जवाब मांगा है।

गुरुवार को ही जम्मू-कश्मीर सरकार की ओर से निवर्तमान डीजीपी एसपी वैद का तबादला करते हुए उन्हें राज्य का परिवहन आयुक्त बनाया गया था। इस तबादले के बाद डीजी जेल दिलबाग सिंह को नए पुलिस महानिदेशक पद का अतिरिक्त प्रभार दिया गया था। सरकार द्वारा इस नियुक्ति के बाद शुक्रवार को दिलबाग सिंह ने एसपी वैद से चार्ज लिया।

उल्‍लेखनीय है कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस ए एम खानविलकर और जस्टिस डीवाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने कार्यवाहक डीजीपी की नियुक्ति के बारे में सुप्रीम कोर्ट के पहले के आदेश में संशोधन के लिए जम्मू कश्मीर सरकार की याचिका पर केंद्र को नोटिस जारी कर उससे इस मामले में जवाब मांगा था। मामले में सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने दो साल के कार्यकाल के आदेश का दुरुपयोग रोकने के लिए कार्यवाहक डीजीपी नियुक्त करने पर प्रतिबंध लगाया था।
राज्य सरकार की ओर से अधिवक्ता शोएब आलम ने कहा कि कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति संघ लोक सेवा आयोग के परामर्श से नियमित नियुक्ति होने तक के लिए पूरी तरह एक अंतरिम व्यवस्था है। उन्होंने राज्य की कानून व्यवस्था की स्थिति का जिक्र करते हुए कहा कि पुलिस बल अपने मुखिया के बगैर नहीं रह सकता है।

बता दें कि गृह मंत्रालय ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दिलबाग सिंह को जम्मू कश्मीर का प्रभारी पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नियुक्‍त किया। 1987 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं दिलबाग सिंह राज्य के जेल महानिदेशक पद पर तैनात थे। आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के आतंकी नवेद के जेल से भाग जाने के बाद उन्हें मार्च 2018 में जेल विभाग का प्रमुख बनाया गया था।

Posted By: Monika Minal