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'आशंकाएं सिर्फ अटकलों पर आधारित', सुप्रीम कोर्ट का जांच समिति में फेरबदल से इनकार

Published: Wed, 16 Sep 2026 10:59 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' के संसद मार्च के दौरान पुलिस ज्यादती की जांच के लिए गठित समिति में फेरबदल से इनकार किया है।

सुप्रीम कोर्ट का जांच समिति में फेरबदल से इनकार।

सुप्रीम कोर्ट का जांच समिति में फेरबदल से इनकार।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने जांच समिति में फेरबदल की मांग ठुकराई।

  2. आशंकाओं को निराधार बताया, समिति ने जांच शुरू नहीं की।

  3. पेलेट गन, महिला सुरक्षा, गवाहों की गोपनीयता पर जोर।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में संसद मार्च के दौरान छात्र प्रदर्शनकारियों पर कथित पुलिस ज्यादती की जांच के लिए गठित पांच सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति में फेरबदल करने से साफ इनकार कर दिया है।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि समिति पर उठाए गए सवाल और आशंकाएं केवल पूर्वाग्रह और अटकलों पर आधारित हैं। समिति का गठन किसी एक पक्ष का समर्थन करने के लिए नहीं, बल्कि पूरी निष्पक्षता और पारदर्शिता के साथ सच्चाई सामने लाने के लिए किया गया है।

प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने सुनवाई के दौरान यह अहम आदेश दिया। कोर्ट ने कहा कि समिति ने अभी अपनी जांच शुरू भी नहीं की है, और उससे पहले ही इस तरह की निराधार आशंकाएं जताना अनुचित है।

पेलेट गन और महिला प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा पर विशेष जोर

सुप्रीम कोर्ट ने समिति को निर्देश दिया है कि वह पेलेट गन के इस्तेमाल, लक्षित हिंसा, महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न और दोनों पक्षों की ओर से हुई हिंसा व संपत्ति के नुकसान की निष्पक्ष जांच करे। कोर्ट ने गवाहों की सुरक्षा को लेकर भी गहरी संवेदनशीलता दिखाई।

पीठ ने कहा कि संवेदनशील गवाहों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए और उनकी पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाए। इसके लिए एक अलग ऑनलाइन पोर्टल बनाने का भी सुझाव दिया गया है ताकि लोग बिना किसी डर के अपने दस्तावेज और बयान दर्ज करा सकें।

'गवाहों के बयानों और साक्ष्यों की गोपनीयता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि हर पीड़ित बिना किसी भय के अपनी बात रख सके।'

क्या था पूरा मामला?

इससे पहले, याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ वकीलों-प्रशांत भूषण और गोपाल शंकरनारायणन ने समिति के एक सदस्य पर हितों के टकराव का आरोप लगाया था। हालांकि, सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने इन आरोपों का कड़ा विरोध करते हुए इन्हें खारिज करने का आग्रह किया था।

यह पूरा मामला 20 जुलाई को दिल्ली में 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के नेतृत्व में संसद मार्च के दौरान हुए संघर्ष से जुड़ा है, जहां प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पें हुई थीं।

सुप्रीम कोर्ट ने इस पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच के लिए पूर्व न्यायाधीश आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में इस पांच सदस्यीय उच्च-स्तरीय समिति का गठन किया है, जिसमें न्यायविदों और पुलिस प्रशासन के दिग्गज शामिल हैं।

(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)