'बार काउंसिल कैसे कर सकती है लॉ कॉलेजों का नियमन', सुप्रीम कोर्ट का सवाल
सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) की लॉ कॉलेजों को विनियमित करने की शक्ति पर सवाल उठाया है।

बार काउंसिल कैसे कर सकती है लॉ कॉलेजों का नियमन।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई के लॉ कॉलेज नियमन पर सवाल उठाया।
अदालत ने बीसीआई की कानूनी शिक्षा में विशेषज्ञता पर संदेह जताया।
बीसीआई को दो सप्ताह में जवाब देने का नोटिस जारी किया गया।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को सवाल किया कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीएसआई) लॉ कॉलेजों का नियमन कैसे कर सकती है। साथ ही कहा कि वह इस बात की पड़ताल करेगा कि क्या बीएसआई के पास इसका अधिकार है। शीर्ष अदालत ने जोर दिया कि नियामक के तौर पर बीएसआई की कानूनी भूमिका किसी व्यक्ति को लॉइसेंस मिलने के बाद ही शुरू होती है।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने कहा, "बीएसआई लॉ कालेजों का नियमन कैसे कर सकती है? असली सवाल यही है। उनकी कानूनी भूमिका किसी को लॉइसेंस मिलने के बाद ही शुरू होती है। इसलिए मुद्दा यह है कि क्या लॉ स्कूलों का नियमन किया जा सकता है? हम यह जांचना चाहते हैं कि क्या बीएसआई के पास विश्वविद्यालयों या लॉ कॉलेज को नियंत्रित करने और उनका नियमन करने का अधिकार है।
प्रधान न्यायाधीश ने मौखिक टिप्पणी में कहा, "कानूनी शिक्षा का नियमन करने के लिए बीएसआई एक विशेषज्ञ निकाय कैसे हो सकती है? वे कानूनी शिक्षा के बारे में क्या जानते हैं? कानून के जाने-माने विद्वान और शिक्षाविद हैं... आप सामान्य दिशानिर्देश तय कर सकते हैं... पाठ्यक्रम चार या पांच वर्ष का होना चाहिए... लेकिन आप नियंत्रण नहीं कर सकते।"
सुप्रीम कोर्ट उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था जिनमें बीएसआई-पर्ल-फर्स्ट ट्रस्ट के कामकाज व ट्रस्ट द्वारा लॉ कॉलेज खोलने पर सवाल उठाए गए थे। पीठ ने याचिकाओं पर नोटिस जारी किया और बीएसआई से दो सप्ताह के अंदर जवाब मांगा।
(समाचार एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
