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पहले लेनी होगी मंजूरी, फिर प्रोजेक्ट पर शुरू होगा काम; ग्रीन क्लीयरेंस पर SC का बड़ा फैसला

Published: Wed, 29 Jul 2026 10:51 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के 2021 के उस कार्यालय ज्ञापन को रद्द कर दिया, जो परियोजनाओं को पिछली तारीख से पर्यावरण मंजूरी देने की व्यवस्था करता था।

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के सरकारी कार्यालय ज्ञापन को रद किया

सुप्रीम कोर्ट ने 2021 के सरकारी कार्यालय ज्ञापन को रद किया

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डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण फैसले में केंद्र सरकार के 2021 के उस कार्यालय ज्ञापन को रद कर दिया, जिसके तहत परियोजनाओं को पिछली तारीख से पर्यावरण मंजूरी देने की व्यवस्था की गई थी। बिना पर्यावरण मंजूरी के शुरू की गई परियोजनाओं के लिए यह प्रविधान किया गया था।

सुप्रीम कोर्ट ने सरकारी कार्यालय ज्ञापन को रद किया

प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने सर्वसम्मति से फैसला सुनाया कि यह आदेश भावी परियोजनाओं पर लागू होगा।

इस तरह अब तक पिछली तारीख से पर्यावरण मंजूरी प्राप्त कर चुकी परियोजनाओं को ध्वस्त करने या अन्य दंडात्मक कार्रवाई से सुरक्षा दी जाएगी।

इन परियोजनाओं में ओडिशा में एक एम्स, कर्नाटक के विजयनगर में एक हवाई अड्डा और प्रदूषण नियंत्रण के लिए जरूरी कई अपशिष्ट उपचार संयंत्र शामिल हैं।

इसके साथ ही शीर्ष अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार के पास पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 की धारा तीन के तहत वैधानिक अधिसूचना के माध्यम से पिछली तारीख से पर्यावरण मंजूरी देने की शक्ति है।

यह आदेश भविष्य की परियोजनाओं पर ही लागू होगा

यह केवल एक प्रशासनिक कार्यालय ज्ञापन जारी करके नहीं किया जा सकता। कहा कि 2021 का कार्यालय ज्ञापन एक प्रशासनिक आदेश है।

यह पर्यावरण मंजूरी के बिना शुरू की गई परियोजनाओं को पर्यावरण स्वीकृति देने के लिए एक स्थायी व्यवस्था प्रदान करता है।

यह 2006 की अधिसूचना के तहत पर्यावरण मंजूरी देने के लिए जांच के तरीके और उसके मानदंड, दोनों को काफी हद तक बदल देता है।

इस प्रकार 2021 का कार्यालय ज्ञापन एक प्रशासनिक निर्देश के जरिये पहले से लागू कानून की जगह ले लेता है, जो कानून के हिसाब से सही नहीं है।