'एक-एक अवैध ढांचा ढहाया जाए', मेरठ के अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट का सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माणों पर सख्त रुख अपनाते हुए एक-एक अवैध निर्माण को ढहाने का आदेश दिया है।

मेरठ के अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट सख्त।
HighLights
सुप्रीम कोर्ट ने मेरठ के सभी अवैध निर्माणों को तत्काल ढहाने का आदेश दिया।
अवैध निर्माण पर ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों को व्यक्तिगत रूप से जिम्मेदार ठहराया जाएगा।
उल्देपुर गांव और ईडब्ल्यूएस/एलआईजी घरों के अवैध निर्माण पर होगी कार्रवाई।
माला दीक्षित, नई दिल्ली। मेरठ में बड़े पैमाने पर अवैध निर्माण पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अख्तियार किया है। सोमवार को कोर्ट ने अवैध निर्माण पर कड़ा संदेश देते हुए कहा कि एक-एक अवैध निर्माण ढहाया जाएगा। कोर्ट ने यूपी आवास विकास परिषद की ओर से दाखिल स्टेटस रिपोर्ट को देखकर कहा कि यह बहुत ही खराब और चिंताजनक स्थिति को दर्शाती है।
कोर्ट ने साफ कहा कि मेरठ में अवैध निर्माण के विरुद्ध चल रही कार्रवाई जारी रहेगी। शीर्ष अदालत ने मेरठ के जोन-ए में स्थित 16,726 अवैध निर्माण और इमारतों के दुरुपयोग के विरुद्ध कार्रवाई करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही मेरठ के बाहरी छोर पर स्थित उल्देपुर गांव में सैकड़ों अवैध कालोनियों पर भी कार्रवाई के आदेश दिए हैं।
जस्टिस जेबी पार्डीवाला और जस्टिस केवी विश्वनाथन की पीठ ने याचिकाकर्ता लोकेश कुमार की याचिका पर सुनवाई के दौरान ये आदेश दिए। लोकेश ने अपने वकील तुषार जैन के जरिये याचिका दाखिल कर मेरठ में अवैध निर्माण का मुद्दा उठाया है।
कोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अवैध निर्माण के प्रति किसी तरह की ढिलाई नहीं की जाएगी। कोर्ट नहीं चाहता कि किसी भी कीमत पर किसी तरह की अप्रिय घटना घटे और मासूमों की जान जाए।
शीर्ष अदालत ने मेरठ के चारों जोनों ए, बी, सी और डी के अवैध निर्माणों पर तत्काल व तत्पर ढंग से कार्रवाई करने के आदेश देते हुए कहा कि भगवान न करे कल अगर कोई अप्रिय घटना होती है और किसी की जान जाती है तो संबंधित सरकारी अधिकारी निजी तौर पर इसके लिए जिम्मेदार ठहराए जाएंगे।
कोर्ट ने यूपी आवास विकास परिषद के कोर्ट में मौजूद अध्यक्ष पी. गुरु प्रसाद से कहा कि आपने हमारा आदेश सुन लिया है, आपकी कार्रवाई में कोई ढिलाई न हो, आप तत्परता से काम करें। आप कोर्ट के आदेश पर काम कर रहे हैं।
कोर्ट ने कहा कि यह सिर्फ शुरुआत है, अवैध निर्माण और अतिक्रमण पर हमें अभी बहुत लंबा जाना है। याचिकाकर्ता लोकेश को धमकियां मिलने की शिकायत पर सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को उत्तर प्रदेश सरकार को निर्देश दिया कि वह उसकी सुरक्षा सुनिश्चित करे।
सुप्रीम कोर्ट के पिछले आदेश के अनुपालन पर यूपी आवास विकास परिषद के अध्यक्ष की ओर से स्टेटस रिपोर्ट दाखिल की गई थी जिसमें मेरठ में अवैध निर्माणों का विस्तृत ब्योरा दिया गया है। रिपोर्ट में पांच प्रकार दिए गए हैं। सेटबैक एरिया का अवैध निर्माण, उल्देपुर गांव में अवैध निर्माण की सर्वे रिपोर्ट, ईडब्ल्यूएस मकानों में अवैध निर्माण, एलआइजी मकानों में अवैध निर्माण और अवैध निर्माण के बारे में नई सर्वे रिपोर्ट।
स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि जिन 44 संपत्तियों को पहले सील किया गया था, उनमें से 20 ढहा दी गई हैं और 24 बची हैं। कोर्ट ने बाकी बची 24 इमारतों के अवैध निर्माणों को जल्दी से जल्दी ध्वस्त करने का आदेश दिया। इसके साथ ही कोर्ट ने सेटबैक एरिया के 138 अवैध निर्माणों के विरुद्ध भी कार्रवाई जारी रखने का आदेश दिया है।
कोर्ट ने कहा कि वह स्टेटस रिपोर्ट में यह देखकर हैरान है कि मेरठ के बाहरी छोर पर स्थिति गांव उल्देपुर में सैकड़ों अवैध कालोनियां हैं। कोर्ट ने निर्देश दिया कि उल्देपुर का प्रत्येक अवैध निर्माण जल्द से जल्द ढहाया जाए। इसके अलावा ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के 486 मकानों में अवैध निर्माण और अवैध इस्तेमाल के विरुद्ध कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है।
हालांकि उत्तर प्रदेश सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ईडब्ल्यूएस और एलआईजी के मकान वालों की आर्थिक स्थिति को देखते हुए उन्हें किसी दूसरी जगह पुनर्वासित करने पर विचार कर रही है। कोर्ट ने कहा कि यह सरकार के ऊपर है कि वह उन्हें दूसरी जगह पुनर्वासित करना चाहती है तो करे, लेकिन कोर्ट यहां अवैध निर्माण पर केंद्रित है।
स्टेटस रिपोर्ट में बताया गया है कि मेरठ कुल चार जोन में बंटा है- ए, बी, सी और डी। जोन-ए में किए गए सर्वे में 16 टीमें लगी थीं और कुल 16,726 अवैध निर्माण चिह्नित किए गए हैं। इनमें से 12,907 रिहायशी हैं। 874 रिहायशी एवं वाणिज्यिक हैं, जबकि 2945 गैर-रिहायशी निर्माण हैं।
कोर्ट ने जोन-ए के 16,726 अवैध निर्माणों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने कहा कि पहला कदम यह होगा कि उन सभी परिसरों को सील किया जाए और उनमें रहने वालों को परिसर खाली करने का आदेश दिया जाए।
कोर्ट ने कहा कि उन्हें नहीं मालूम कि जोन बी, सी और डी में कितने अवैध निर्माण हैं क्योंकि उनका सर्वे नहीं हुआ है। कोर्ट ने आदेश दिया कि अगली स्टेटस रिपोर्ट में इस सभी का ब्योरा दिया जाए। अगली सुनवाई नौ दिसंबर को होगी।
