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'2016 से ₹50 लाख दे चुका हूं और स्कूल की फीस भी भर रहा हूं', बच्चे के गुजारा भत्ता को लेकर SC में पिता की दलील

Published: Fri, 02 Oct 2026 03:49 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले पर नोटिस जारी किया है, जिसमें एक पिता को 2016 ...और पढ़ें

सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर नोटिस दिया।

सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर नोटिस दिया।

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने गुजारा भत्ता मामले में हाईकोर्ट के फैसले पर नोटिस दिया।

  2. पिता को 2016 से 50 हजार रुपये मासिक गुजारा भत्ता देने का आदेश।

  3. पिछली तारीख से वित्तीय देनदारी की कानूनी समीक्षा करेगा सुप्रीम कोर्ट।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के उस फैसले के खिलाफ दायर विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए नोटिस जारी किया है, जिसमें एक पिता को अपने नाबालिग बेटे के लिए 2016 से 50 हजार प्रति माह की दर से बढ़ा हुआ गुजारा भत्ता देने का निर्देश दिया गया था।

सुप्रीम कोर्ट अब इस कानूनी पहलू की समीक्षा करेगा कि क्या किसी व्यक्ति की सालों बाद आंकी गई कमाई की क्षमता के आधार पर पिछली तारीख से वित्तीय देनदारी तय की जा सकती है।

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा विवाद 25 मई 2023 को फैमिली कोर्ट के एक आदेश के बाद शुरू हुआ था, जिसमें कोर्ट ने पिता को बच्चे की शिक्षा के खर्च के अलावा 20 हजार रुपए प्रतिमाह गुजारा भत्ता देने का आदेश दिया था इसके बाद दोनों पक्षों ने हाईकोर्ट का रुख किया।

इस मामले पर पंजाब और हाईकोर्ट ने 23 जुलाई 2026 को फैसला सुनाया था और गुजारा भत्ते की रकम को बढ़ाकर 50 हजार रुपए प्रति माह कर दिया और इसे 4 फरवरी 2016 से लागू करने का आदेश दे दिया। इसके खिलाफ पिता ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला सुनाया

30 सितंबर को जस्टिस के.वी. विश्वनाथन और अरुण पल्ली की पीठ ने इस मामले की सुनवाई की थी। पिता की ओर से पेश हुए एडवोकेट सुमित गहलोत ने कोर्ट के सामने कई दलीलें रखीं।

एडवोकेट ने कहा कि पिता की कमाई का आकलन गलत किया गया है। हाईकोर्ट ने पिता की कमाई की क्षमता 2.25 लाख रुपए प्रति माह आंकी है जबकि आयकर रिटर्न और फार्म 16 के अनुसार उनकी शुद्ध मासिक आय 94,175 रुपए थी।

याचिका में कहा गया कि 2016 से लेकर अब तक वित्तीय स्थिति एक जैसी नहीं रही। 2018 में नौकरी छूटने और इलाज के खर्चों जैसी वास्तविक परिस्थितियों को नजरअंदाज कर बाद में आंकी गई आय को 2016 से एक समान लागू नहीं किया जा सकता।

पिता पहले से ही डोमेस्टिक वायलेंस एक्ट के तहत अपनी अलग रह रही पत्नी को 20,000 रुपए प्रति माह दे रहे हैं। ऐसे में बच्चे के लिए 50,000 रुपए प्रति माह की अतिरिक्त देनदारी मिलाकर कुल मासिक भुगतान 70,000 रुपए हो जाता है, जो उनकी घोषित शुद्ध आय का लगभग 74.3 प्रतिशत है।

पिता ने कोर्ट को बताया कि वे 2016 से अब तक लगभग 50 लाख रुपए का भुगतान कर चुके हैं और बच्चे की सेंट जेवियर्स स्कूल की फीस भी भर रहे हैं। यदि पूर्व में दिए गए 20,000 रुपए प्रति माह और स्कूल फीस का समायोजन किया जाए, तो कोई बकाया नहीं बनता।

पिता ने सुप्रीम कोर्ट के रजनीश बनाम नेहा का संदर्भ देते हुए यह कानूनी प्रश्न उठाया है कि क्या आवेदन दाखिल करने की तारीख से देय मेंटेनेंस की गणना, आवेदन के वर्षों बाद आंकी गई माता-पिता की संभावित कमाई की क्षमता के आधार पर पिछली तारीख से की जा सकती है?

सुप्रीम कोर्ट में 30 अक्टूबर को अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने पिता की दलीलों को रिकॉर्ड पर लेते हुए नोटिस जारी किया है और मुकदमे के खर्च के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 30 अक्टूबर 2026 को तय की गई है।