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सिस्टम की आलोचना को निंदा के रूप में नहीं लेना चाहिए', बोले SC के न्यायमूर्ति मनमोहन

Published: Sun, 19 Apr 2026 12:18 AM (IST)

सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति मनमोहन ने कहा कि सिस्टम की आलोचना को निंदा नहीं, बल्कि सुधार के सुझाव के रूप ...और पढ़ें

'सिस्टम की आलोचना को निंदा के रूप में नहीं लेना चाहिए', बोले SC के जस्टिस मनमोहन

'सिस्टम की आलोचना को निंदा के रूप में नहीं लेना चाहिए', बोले SC के जस्टिस मनमोहन

HighLights

  1. सिस्टम की आलोचना को निंदा नहीं, सुझाव मानें।

  2. न्यायपालिका में सुधार हेतु कमियों को उजागर करना आवश्यक।

  3. कानून फर्मों को वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने का आग्रह।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति मनमोहन ने शनिवार को कहा कि मौजूदा सिस्टम की किसी भी आलोचना को निंदा के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए, बल्कि इसे एक सुझाव के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने सोसाइटी ऑफ इंडियन लॉ फर्म और सोसाइटी ऑफ लीगल प्रोफेशनल द्वारा आयोजित कानूनी सम्मेलन में 'सभी के लिए न्याय- सुलभ और सस्ता' विषय पर बोलते हुए यह बात कही।

जस्टिस मनमोहन ने कहा- ''पिछली बार मैंने सिस्टम में सुधार के बारे में बात की थी और मेरी बात को कुछ लोगों ने इस तरह से समझा जैसे यह सिस्टम की निंदा हो। जब आप सिस्टम में सुधार के बारे में बात करते हैं तो आपको अक्सर उन मुद्दों के बारे में बात करनी पड़ती है जो सिस्टम में पैदा होते हैं।

जब आप सिस्टम की कमियों को उजागर करते हैं, तो आप ऐसा केवल सिस्टम को सुधारने के लिए करते हैं न कि इसकी निंदा करने के लिए। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि एक फिल्म जो सामाजिक बुराइयों को उजागर करती है, उसे दर्शाना आवश्यक है। इसके अलावा उन्होंने कानून फर्मों से वैश्विक दृष्टिकोण अपनाने का अनुरोध किया।

(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)

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