जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। जम्मू कश्मीर मे प्रतिबंधों के कारण हाईकोर्ट का आम लोगों की पहुंच से दूर होने के आरोपों का जम्मू कश्मीर के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट समर्थन नहीं करती। शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने याचिकाकर्ता से कहा कि जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश की रिपोर्ट उन्हें मिल गई है और उन्होंने रिपोर्ट देखी है रिपोर्ट आरोपों का समर्थन नहीं करती। हालांकि कोर्ट ने मामला बच्चों से जुड़ा हुआ होने के कारण हाईकोर्ट की जुविनाइल जस्टिस कमेटी को याचिका में कही गई बातों पर संज्ञान लेते हुए रिपोर्ट देने को कहा है। कोर्ट ने कमेटी से एक सप्ताह में रिपोर्ट मांगी है। मामले पर एक सप्ताह बाद फिर सुनवाई होगी।

विरोधाभासी रिपोर्ट की हो जांच 

जम्मू कश्मीर में प्रतिबंधों के मामले में पिछली सुनवाई पर जब कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकील हुजेफा अहमदी से मामले को जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट के समक्ष उठाने को कहा था तो वकील का कहना था कि हाईकोर्ट पहुंचना कठिन है। जिस मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई ने उनसे कहा था कि आप जो कह रहे हैं अगर वह बात सही है तो मामला गंभीर है और वह इस बात की जांच करेंगे। कोर्ट ने जम्मू कश्मीर के मुख्य न्यायाधीश से मामले पर रिपोर्ट मांगी थी। उन्हें कुछ विरोधाभासी रिपोर्ट भी मिली हैं जिसकी जांच की जरूरत है। कोर्ट ने कहा कि वह फिलहाल रिपोर्ट पर कोई टिप्पणी नहीं कर रहे। हालांकि सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बच्चों के मामले मे किसी भी कार्यवाही से पहले जेजे बोर्ड को बताया जाता है। याचिका में हिरासत में लिए गए 18 साल के कम उम्र के नाबालिगों के बारे में हाईकोर्ट की जेजे कमेटी से संज्ञान लेने का निर्देश मांगा था।

मुबीन अहमद शाह की हिरासत पर नोटिस

इसके अलावा कोर्ट ने एनआरआइ व्यापारी मुबीन अहमद शाह की हिरासत पर जम्मू कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। कोर्ट ने यह नोटिस शाह की पत्नी आसिफा मुबीन की ओर से पति की हिरासत को चुनौती देने वाली बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई के दौरान जारी किये। कोर्ट ने नोटिस पर दो सप्ताह में जवाब मांगा है। हालांकि सरकार की ओर से पेश सालिसिटर जनरल ने नोटिस जारी करने का विरोध करते हुए कहा कि शाह को गत 7 अगस्त को हिरासत में लिया गया था। उसके भाई ने भी एक ऐसी ही याचिका हाईकोर्ट मे दाखिल कर रखी है जिस पर हाईकोर्ट नोटिस भी जारी कर चुका है। लेकिन शाह की पत्नी की ओर से कहा गया कि भाई की ओर से याचिका नहीं दाखिल की गई है।

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Posted By: Monika Minal

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