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क्या TMC के 20 बागी सांसदों की जाएगी सदस्यता? अभिषेक बनर्जी की याचिका पर SC ने भेजा नोटिस

Published: Tue, 25 Aug 2026 12:11 PM (IST)Updated: Tue, 25 Aug 2026 12:20 PM (IST)

सुप्रीम कोर्ट ने अभिषेक बनर्जी की याचिका पर 20 बागी टीएमसी सांसदों को नोटिस जारी किया है। बनर्जी ने लोकसभा ...और पढ़ें

टीएमसी के बागी सांसदों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस। (फाइल फोटो।)

टीएमसी के बागी सांसदों को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस। (फाइल फोटो।)

HighLights

  1. सुप्रीम कोर्ट ने 20 बागी टीएमसी सांसदों को नोटिस जारी किया।

  2. अभिषेक बनर्जी ने अयोग्यता याचिकाओं पर जल्द फैसले की मांग की।

  3. लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को निर्देश देने का आग्रह किया।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को तृणमूल कांग्रेस नेता अभिषेक बनर्जी की उस याचिका पर सुनवाई करने पर सहमति जताई, जिसमें लोकसभा स्पीकर ओम बिरला से उन 20 बागी सांसदों की अयोग्यता की याचिकाओं पर जल्द फैसला लेने की मांग की गई है, जो नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में शामिल हो गए हैं।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस जॉयमाल्य बागची और वी. मोहना की बेंच ने बनर्जी की याचिका पर उन 20 सांसदों को नोटिस जारी किया। सुप्रीम कोर्ट ने लोकसभा स्पीकर के ऑफिस और सदन के सेक्रेटरी-जनरल को नोटिस जारी करने से इनकार कर दिया, क्योंकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि वे उनका प्रतिनिधित्व करने के लिए वहां मौजूद हैं।

अभिषेक बनर्जी ने क्या मांग की है?

सुप्रीम कोर्ट शिवसेना (UBT) की एक ऐसी ही याचिका पर भी सुनवाई कर रहा है, जिसमें स्पीकर द्वारा महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में पार्टी के छह सांसदों के विलय को मंजूरी देने को चुनौती दी गई है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच उस याचिका पर सुनवाई कर रही है।

बनर्जी ने अपनी याचिका में सांसदों के खिलाफ शुरू की गई अयोग्यता की कार्यवाही पर फैसले में कथित देरी को चुनौती दी है। टीएमसी नेता ने स्पीकर से संविधान के दलबदल-रोधी प्रावधानों के अनुसार अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने का निर्देश देने की मांग की है। उन्होंने पहले उन 20 सांसदों के खिलाफ अलग-अलग याचिकाएं दायर की थीं और बाद में स्पीकर से उनके निपटारे में तेजी लाने का आग्रह किया था।

क्या है मामला?

रिपोर्ट्स के मुताबिक, 27 जुलाई को लिखित रिमाइंडर भेजने के बाद उन्होंने 12 अगस्त को इस मुद्दे पर बिरला से मुलाकात भी की थी। यह विवाद टीएमसी संसदीय दल के भीतर बगावत के बाद शुरू हुआ, जब उसके 20 लोकसभा सांसदों ने घोषणा की कि वे त्रिपुरा स्थित राजनीतिक संगठन एनसीपीआई में शामिल हो गए हैं या उसका विलय कर लिया है और सदन में अलग मान्यता की मांग की।

टीएमसी का कहना है कि सांसद उसके चुनाव चिह्न पर चुने गए थे और किसी अन्य राजनीतिक संगठन के साथ जुड़ने का उनका फैसला स्वेच्छा से पार्टी की सदस्यता छोड़ने के बराबर है, जिससे दलबदल-रोधी कानून के तहत अयोग्यता की कार्रवाई हो सकती है। हालांकि, बागी गुट का कहना है कि उनका कदम एक वैध विलय है।

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