सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम का बड़ा फैसला, 4 हाई कोर्ट के 12 अपर न्यायाधीशों को स्थायी बनाने की मिली मंजूरी
सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने आंध्र प्रदेश, केरल, उत्तराखंड और गौहाटी हाई कोर्ट में 12 अपर न्यायाधीशों को स्थायी जज के तौर पर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है।

सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने चार हाई कोर्ट के 12 अपर न्यायाधीशों को स्थायी जज बनाने को दी मंजूरी
HighLights
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में पांच अपर न्यायाधीशों को स्थायी तौर पर नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में वाणिज्यिक मुकदमों व इनकी अदालतों के बुनियादी ढांचे का मांगा डाटा
पीटीआई, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट कोलेजियम ने आंध्र प्रदेश, केरल, उत्तराखंड और गौहाटी हाई कोर्ट में 12 अपर न्यायाधीशों को स्थायी जज के तौर पर नियुक्त करने को मंजूरी दे दी है।
प्रधान न्यायाधीश (सीजेआई) सूर्यकांत और जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस बी.वी. नागरत्ना वाले कोलेजियम ने बुधवार को हुई बैठक में यह फैसला लिया।
आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट में पांच अपर न्यायाधीशों को स्थायी तौर पर नियुक्त करने की मंजूरी दी गई है। इनमें अपर न्यायाधीश महेश्वर राव कुंचेम, थूटा चंद्र धना सेकर, चल्ला गुणरंजन, अवधानम हरि हरनाध शर्मा, और डॉ. यादवल्ली लक्ष्मणा राव को स्थायी जज बनाया गया है।
इसी तरह कोलेजियम ने केरल हाई कोर्ट के अपर न्यायाधीश पी. कृष्णा कुमार, के.वी. जयकुमार, मुरली कृष्णा एस., जोबिन सेबेस्टियन और पी.वी. बालकृष्णन को स्थायी जज के तौर पर नियुक्ति की मंजूरी दी।
कोलेजियम ने अपर न्यायाधीश सुभाष उपाध्याय को उत्तराखंड हाई कोर्ट का स्थायी जज नियुक्त किया। एक और प्रस्ताव में अपर न्यायाधीश कौशिक गोस्वामी को गौहाटी हाई कोर्ट का स्थायी जज नियुक्त करने को मंज़ूरी दी।
सुप्रीम कोर्ट ने देशभर में वाणिज्यिक मुकदमों व इनकी अदालतों के बुनियादी ढांचे का मांगा डाटा
सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को देशभर में लंबित वाणिज्यिक मामलों और वाणिज्यिक अदालतों के लिए उपलब्ध बुनियादी ढांचे के बारे में अपडेटेड आंकड़े तलब किए। ऐसे मामलों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए अतिरिक्त वाणिज्यिक अदालतें स्थापित करने के मकसद से शीर्ष अदालत ने 10 अगस्त को राज्यों और 10 हाई कोर्टों को नोटिस जारी किए थे।
प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जोयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की पीठ इंडियन कमर्शियल एंड आर्बिट्रेशन बार एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता संगठन ने उसके समक्ष एक तालिकाबद्ध जानकारी रखी थी जिसमें 31 जनवरी, 2025 तक लंबित वाणिज्यिक मामलों की संख्या और ऐसी अदालतों के लिए उपलब्ध कराए गए बुनियादी ढांचे का विवरण था।
पीठ ने कहा कि इस जानकारी को कम से कम 31 जनवरी, 2026 तक अपडेट करने की आवश्यकता है, साथ ही अब तक उपलब्ध कराए गए बुनियादी ढांचे का विवरण भी देना होगा।
पीठ ने याचिकाकर्ता से वाणिज्यिक मुकदमों में वृद्धि पर राज्यवार आंकड़े एकत्रित करने और राज्यों में अतिरिक्त वाणिज्यिक अदालतों की आवश्यकता का अनुमान देने को भी कहा।
पीठ ने अपनी रजिस्ट्री को निर्देश दिया था कि वह सभी हाई कोर्टों को डिजिटल, तालिकाबद्ध रूप में जानकारी उपलब्ध कराए और सुनवाई की अगली तिथि से पहले जवाब मांगे।
आप नेता सिंगला की जमानत याचिका पर ईडी को सुप्रीम कोर्ट का नोटिस
सुप्रीम कोर्ट ने आम आदमी पार्टी के नेता दीपक सिंगला द्वारा दायर एक याचिका पर केंद्रीय जांच एजेंसी ईडी से जवाब मांगा है, जिसमें उन्होंने पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है जिसने उनके मनी लांड्रिंग के मामले में जमानत खारिज कर दी थी।
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जायमाल्या बागची और वी.मोहन की पीठ ने गुरुवार को सिंगला द्वारा हाई कोर्ट के नौ सितंबर के आदेश के खिलाफ दायर याचिका पर ईडी को नोटिस जारी किया। सिंगला को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 18 मई को गिरफ्तार किया था। कपिल सिब्बल ने शीर्ष अदालत में सिंगला का प्रतिनिधित्व किया।
यह मामला 2018 में पूर्वी ओरिएंटल बैंक आफ कॉमर्स के एक सहायक महाप्रबंधक की शिकायत पर दर्ज सीबीआइ की एफआइआर से संबंधित है।
इसमें आरोप लगाया गया था कि महेश टिम्बर प्राइवेट लिमिटेड ने अपनी सिंगापुर स्थित सहायक कंपनी के माध्यम से एक बैंक अधिकारी के साथ मिलकर, बिना बैंक के कोर बैंकिंग सिस्टम फिनेकल में संबंधित प्रविष्टियों के अवैध स्विफ्ट संशोधनों से विदेशी पत्रों की क्रेडिट को धोखाधड़ी से बढ़ाया।
इससे बैंक को लगभग 155.21 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। सीबीआई ने 10 अगस्त, 2020 को चार्जशीट दाखिल की, जिसके बाद ईडी ने कार्रवाई शुरू की।
