ताजमहल के पास उद्योग खोलने का रास्ता साफ, सुप्रीम कोर्ट से 400 लंबित आवेदनों को हरी झंडी
सुप्रीम कोर्ट ने ताज संरक्षित क्षेत्र (टीटीजेड) में प्रदूषण न फैलाने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों के लिए लंबित 400 से अधिक आवेदनों पर कार्रवाई की अनुमति दी है।
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सुप्रीम कोर्ट

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जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने ताज संरक्षित क्षेत्र (टीटीजेड) में प्रदूषण न फैलाने वाले सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम (एमएसएमइ) उद्योग खोलने के लिए लंबित 400 आवेदनों पर कार्रवाई करने की अनुमति दे दी है।
हालांकि शीर्ष अदालत ने निर्देश दिया है कि हर प्रस्ताव की जांच केंद्रीय अधिकारिता समिति (सीईसी) और नेशनल एनवायरमेंटल इंजीनियरिंग रिसर्च इन्स्टीट्यूट (नीरी) के विशेषज्ञों द्वारा दी जाए और किसी भी तरह की आपत्ति होने पर संबंधित आवेदन को सुप्रीम कोर्ट की मंजूरी के बिना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
SC से 400 एमएसएमई आवेदनों को मंजूरी
ताज संरक्षित क्षेत्र (टीटीजेड) 10,400 वर्ग किलोमीटर का एक संरक्षित क्षेत्र है जिसे आगरा में ताजमहल एवं अन्य संरक्षित स्मारकों को पर्यावरणीय नुकसान से बचाने के लिए बनाया गया है। इस क्षेत्र में किसी भी तरह के प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों की मनाही है।
गुरुवार को टीटीजेड जोन में एमएसएमइ की गैर प्रदूषित इकाइयां लगाने के 400 से ज्यादा आवेदनों के लंबित होने का मामला चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जोयमाल्या बाग्ची और वी. मोहना की पीठ के समक्ष उठाया गया। कोर्ट को बताया गया कि सुप्रीम कोर्ट ने ताजमहल को प्रदूषण से बचाने के लिए 1996 से कई प्रतिबंध लगा रखे हैं।
कोर्ट ने कहा कि हालांकि टीटीजेड के लिए विजन डाकूमेंट, प्रभाव आंकलन और प्रदूषण न फैलाने वाले उद्योंगों की परिभाषा पर नीरी की अंतिम रिपोर्ट सहित मुख्य अध्ययन अभी भी लंबित है, लेकिन इनके लंबित होने के कारण टीटीजेड अथारिटी को पहले से मिले आवेदनों पर विचार करने में देरी नहीं होनी चाहिए।
पीठ ने अटार्नी जनरल आर. वेंकटरमणी, एडीशनल सालिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी की दलीलों पर ध्यान दिया कि आटा मिल जैसे प्रदूषण न फैलाने वाले एमएसएमइ स्थापित करने पर विचार किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा कि ऐतिहाती सिद्धांत का सख्ती से पालन किया जाए, और ऐसा संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों की सलाह, और जहां जरूरी हो उनकी सीधी देखरेख में किया जाए। कोर्ट ने आदेश में कहा कि टीटीजेड अथारिटी लंबित आवेदनों पर कार्रवाई कर सकती है।
साथ ही कहा कि ऐसे आवेदनों पर विचार करने के लिए बुलाई गई हर बैठक में सीईसी द्वारा नामित सदस्य और नीरी के एक विशेषज्ञ प्रतिनिधि को भाग लेने के लिए आमंत्रित किया जाएगा। जब तक दोनों विशेषज्ञ मौजूद न हों, तबतक कोई बैठक नहीं होगी।
पर्यावरण संरक्षण के साथ आजीविका पर भी ध्यान
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि कि अगर दोनों में से किसी भी विशेषज्ञ की यह राय हो कि किसी खास इंटस्ट्री को प्रदूषण न फैलाने वाली इंडस्ट्री के तौर पर क्लासीफआइ नहीं दिया जा सकता, तो संबंधित आवेदन को इस कोर्ट की मंजूरी के बिना स्वीकार नहीं किया जाएगा।
कोर्ट ने आदेश दिया कि जिसमें सीईसी और नीरी दोनों के प्रतिनिधि सहमत हों, उन आवेदनों पर कानून के मुताबिक आगे की कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि ऐसे सभी फैसलों को सीईसी की वेबसाइट पर अपलोड किया जाना चाहिए।
सुनवाई के दौरान ऐश्वर्या भाटी ने कहा कि टीटीजेड में किसी भी भारी उद्योग पर विचार नहीं किया जा रहा है सिर्फ एमएसएमइ ही मंजूरी मांग रहे हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 400 आवेदन लंबित हैं।
नये उद्योग लगाने पर पूरी तरह रोक से लोगों की आजीविका पर असर पड़ रहा है। लाखो लोगों की उम्मीदों को कैसे रोक सकते हैं। यह 10400 वर्ग किलोमीटर का क्षेत्र है जिसमें छह जिले आते हैं।
दूसरी ओर हस्तक्षेप अर्जीकर्ता की ओर से पेश वकील अपर्णा भट ने पर्यावरण सुरक्षा नियमों मे किसी भी तरह की ढील का विरोध किया।
