नई दिल्ली, पीटीआइ। शारदा चिट फंड मामले में मंगलवार को केंद्रीय जांच एजेंसी (CBI) की अवमानना याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई दो सप्ताह तक टाल दी। बहुचर्चित घोटाले मामले में जांच एजेंसी ने कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार और अन्य के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच सौंपने  पर पश्चिम बंगाल में पोंजी स्कीम मामलों की जांच क सीबीआइ कर रही है। एजेंसी ने चार फरवरी, 2019 को राजीव कुमार, पूर्व मुख्य सचिव मलय कुमार डे और राज्य के डीजीपी वीरेंद्र के खिलाफ अवमानना याचिका दायर की । इसमें कहा गया है कि चल रही जांच में उनका सहयोग नहीं मिल रहा है। 

एजेंसी ने कुमार को दी गई जमानत को रद करने और उनकी हिरासत में लेकर पूछताछ करने की भी मांग की है। जस्टिस एस अब्दुल नजीर और संजीव खन्ना की खंडपीठ ने सुनवाई को दो सप्ताह के लिए टाल दिया क्योंकि यह फ्रैंकलिन टेम्पलटन की छह म्यूचुअल फंड योजनाओं को बंद करने से संबंधित मामले की अंतिम सुनवाई कर रही है। सारदा ग्रुप पर चिट फंड के तर्ज पर ज्यादा रिटर्न का लालच देकर लाखों निवेशकों को के धोखाधड़ी करने का आरोप है। कंपनी ने इसके माध्यम से कुछ ही सालों में  2,500 करोड़ रुपये जुटा लिए।

इस घोटाले का खुलासा 2013 में हुआ। कुमार उस वक्त बिधाननगर के पुलिस आयुक्त थे। वह पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा घोटाले की जांच करने के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) का हिस्सा थे। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में सीबीआइ को अन्य चिट फंड मामलों के साथ मामला सौंप दिया। नवंबर 2019 में, कोर्ट ने कलकत्ता हाई कोर्ट द्वारा चिट फंड घोटाले में दी गई अग्रिम जमानत को चुनौती देने वाली सीबीआइ की अपील पर आइपीएस अधिकारी से जवाब मांगा।

जांच एजेंसी ने एक अक्टूबर, 2019 को कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर की थी। हाई कोर्ट ने कुमार को जांच अधिकारियों के साथ सहयोग करने और सीबीआइ द्वारा 48 घंटे के नोटिस पर पूछताछ के लिए उनके समक्ष पेश होने का निर्देश दिया था। 

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