जागरण संवाददाता, अटारी बार्डर [अमृतसर]। सरहद पर राखी बंधवाने के लिए खड़े बीएसएफ व सीआरपीएफ के जवानों को एक-एक कर राखी बांधती शहीद सरबजीत की बहन दलबीर कौर व बेटी पूनम आगे बढ़ रही थीं। दिल में भाई सरबजीत का दर्द समेटे दलबीर की आंखें जब आंसुओं को नहीं संभाल सकीं तो वह छलक पड़े मगर अनजाने में ही एक सिपाही की आगे बढ़ी कलाई ने उन्हें जमीन पर गिरने से रोक लिया। सैनिक ने सिर उठाया तो दलबीर कौर को लगा सरबजीत कह रहा है 'भैण जी हुण बरफी खिला दो'। जब सिपाहियों को मिठाई खिलातीं तो लगता वह अपने सरबजीत को ही खिला रही हैं।

बेटी पूनम कहती है कि हम हमेशा पापा को राखी भेजा करते थे। 23 साल से जो सिलसिला चल रहा था, वह टूट गया है। हमने इस बार सैनिक भाइयों को राखी बांधने का फैसला किया, हालांकि बुआ पहले भी सैनिक भाइयों को राखी बांधा करती थीं। लेकिन मैं पहली बार सैनिक भाइयों को राखी बांधकर उनसे यह वचन लेने आई हूं कि जरूरत पड़ने पर पाकिस्तान को नाको चने चबाने पर मजबूर कर दें, ताकि किसी बहन की राखी पाकिस्तानी जेल में बंद अपने भाई की कलाई का इंतजार न करती रहे। दलबीर कहती है कि अगर पाकिस्तान छोटे भाई का धर्म नहीं निभा सकता तो कम से कम एक पड़ोसी होने का फर्ज तो निभाए।

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