चंडीगढ़ [जागरण न्यूज नेटवर्क]। पाकिस्तान में लाहौर की जेल में बंद, मौत की सजा पाए भारतीय नागरिक सरबजीत सिंह को सरकार जल्द राहत दे सकती है। सरबजीत के वकील अवैस शेख ने शनिवार को चंडीगढ़ में मीडिया से बातचीत में कहा कि पाकिस्तान की सरकार दया याचिका पर गंभीरता से विचार कर रही है और उसे जल्द रिहा कर देगी।

शेख ने उम्मीद जताई कि सरबजीत को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के पाकिस्तान दौरे से पहले रिहा कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी ने भी संकेत दिए हैं कि सरबजीत के मसले पर सभी पहलुओं पर ध्यान रखते हुए जल्द ही कोई फैसला किया जाएगा।

शेख ने सरबजीत के जीवन पर सरबजीत सिंह की अजीब दास्तान किताब भी लिखी है इसमें सरबजीत के हाथ का लिखा खत भी है जो उसकी बेगुनाही की कहानी कह रहा है। पाकिस्तान के मीडिया ने भी किताब को खूब समर्थन दिया है। शेख ने कहा मैं हर डेढ़ माह बाद सरबजीत से मिलता रहा हूं अब भी चार माह पहले सरबजीत सिंह से मुलाकात हुई थी। वह ठीक है, चिंता करने की जरूरत नहीं है। शेख ने कहा सरबजीत जल्द रिहा होगा उसे इसकी पूरी उम्मीद है।

उल्लेखनीय है कि ज्ञातव्य हो कि 22 वर्ष पूर्व 28 अगस्त, 1990 को खालड़ा बार्डर क्षेत्र में 22 वर्षीय भाई सरबजीत सिंह को पाकिस्तान ने उस समय पकड़ लिया था, जब वह अपने खेतों में ट्रेक्टर चला रहा था। तरनतारन के भिखी विंड गांव की आंखें तब से सरबजीत को देखने के लिए तरस रही हैं।

सरबजीत की कसाब से तुलना नामुमकिन

पाकिस्तान के मानवाधिकार संगठन पाक-इंडिया पीस इनीशिएटिव के पीस एंबेसेडर व पाक हाईकोर्ट के वकील अवैस शेख ने अफलज कसाब की सरबजीत से तुलना करने व बराबर सजा देने के बयानों को नकारते हुए कहा कि अफजल कसाब, पाकिस्तानी जासूस था यह पाक सरकार भी मान चुकी है। उसने पाकिस्तान में 1 साल तक ट्रेनिंग ली थी यह भी सच है। सरबजीत का केस उससे हर तरह अलग है वह बेगुनाहगार और दुनियाभर में उसकी रिहाई के लिए आवाज उठ रही है।

उन्होंने कहा कि सरबजीत पर बम धमाकों में शामिल होने के इल्जाम बेबुनियाद हैं। सरबजीत और मनजीत सिंह नाम का उससे कुछ लेना देना नहीं है।

सिर कलम करने का वाकिया साजिश:

शेख ने कहा कि भारतीय सैनिकों पर हमला और सिर काटने की कार्रवाई निंदनीय है और यह एक साजिश का हिस्सा है जोकि भारत और पाक में तनाव बढ़ाने के लिए सिरफिरों द्वारा पहले भी की जाती रही हैं। उन्होंने कहा पाक सरकार इस घटना की यूएनओ के नेतृत्व में कमेटी गठित कर जांच करवाने के लिए भी तैयार है यह पाक सरकार या पाक सेना का कृत्य नहीं है। विश्व की कोई भी सेना ऐसा बर्ताव नहीं करती।

पाक में अल्पसंख्यकों से भेदभाव नहीं :

सरबजीत के वकील शेख ने कहा कि भारत और पाक में बीते सालों में रिश्तों में दरार काफी कम हुई है। दोनों देश एक दूसरी की स्थिरता के पक्षधर हैं।

पाक में जागीरदारी प्रथा के दौरान अल्पसंख्यकों को जरुर अलग रखा गया लेकिन अब यह हालात नहीं है वहां भी प्रजातंत्र को बल मिल रहा है और जनता भी फौजी हुकूमत का समर्थन नहीं करती। वर्तमान में फौज की भागीदारी भले ही सरकार में हो लेकिन जनता प्रजातंत्र की हिमायती है।

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