हरिद्वार [जासं]। आसाराम पर दुष्कर्म का मामला दर्ज होने के मामले में हरिद्वार के संतों का कहना है कि बापू का विवादों से चोली-दामन का साथ रहा है। धर्मनगरी के संत उन्हें न तो संन्यासी और न ही संत मानते हैं।

अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत ज्ञानदास का कहना है कि इस मामले में सच्चाई लोगों के सामने आनी चाहिए। आसाराम ने ऐसा कोई काम नहीं किया, जिससे उन्हें संत कहा जाए।

दक्षिण काली मंदिर के पीठाधीश्वर महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्माचारी ने कहा कि 'आसाराम किसी भी लिहाज से संत हैं ही नहीं। उन्होंने न तो किसी अखाड़े से संन्यास लिया और न ही किसी गुरु से दीक्षा। वह सिर्फ एक कथा वाचक हैं। उन्हें संत कहना संत गरिमा के खिलाफ है।' हरिसेवा आश्रम के परमाध्यक्ष महामंडलेश्वर स्वामी हरिचेतनानंद महाराज के मुताबिक 'अपने नाम के आगे संत लगाने मात्र से कोई संत नहीं हो जाता है। संत शब्द की परिभाषा के विषय में मंथन होना चाहिए।' महानिर्वाणी अखाड़ा के सचिव महंत रविंद्र पुरी ने कहा कि 'जिस तरह आसाराम की विवादित छवि रही है, उससे संत शब्द का दुरुपयोग हुआ है।' वहीं भारत माता मंदिर के महंत ललितानंद गिरी का कहना है कि 'कोई भी ऐसा व्यक्ति जो हमेशा विवादों में रहता हो, उसे संत कहलाने का कोई हक ही नहीं है। फिर आसाराम न तो संन्यासी हैं और न ही किसी अखाड़े व संप्रदाय से जुड़े हैं। वो स्वयंभू संत कहलाने वाले हैं।'

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