'भारत मॉस्को के लिए प्राकृतिक विकल्प', रूस-यूरोप तनाव के बीच बोले जयशंकर; चीन को भी दी सलाह
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस के साथ भारत के मजबूत संबंधों और चीन के साथ सीमा विवाद पर भारत के स्पष्ट रुख को दुनिया के सामने रखा।
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विदेश मंत्री एस जयशंकर।
HighLights
भारत रूस के लिए यूरोप का 'प्राकृतिक विकल्प' है।
यूक्रेन युद्ध से रूस-यूरोप संबंध पूरी तरह टूट गए हैं।
चीन को सीमा पर शांति बनाए रखने की स्पष्ट सलाह।
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने बुधवार को एक कार्यक्रम के दौरान रूस के साथ भारत के मजबूत रिश्तों और चीन के साथ सीमा विवाद पर भारत का स्पष्ट रुख दुनिया के सामने रखा है।
ब्लूमबर्ग के एडिटर-इन-चीफ जॉन मिकेलथवेट के साथ बातचीत में जयशंकर ने रूस और यूरोप के बीच खराब हुए रिश्तों का जिक्र किया। साथ ही कहा कि यूरोप से कड़वाहट के बाद रूस के लिए भारत एक प्राकृतिक विकल्प
रूस-यूरोप के बिगड़े रिश्ते
बातचीत के दौरान जयशंकर ने कहा कि यूक्रेन युद्ध के बाद से रूस और यूरोप के रिश्ते पूरी तरह टूट चुके हैं और उनमें भारी कड़वाहट आ गई है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ऐतिहासिक रूप से रूस खुद को यूरोपीय देश मानता रहा है, लेकिन अब हालात बदलने के कारण रूस को मजबूरन एशिया की ओर रुख करना पड़ा है, जिसमें चीन उसकी प्राथमिकता में है।
जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत पिछले 75-80 वर्षों से रूस का भरोसेमंद और स्थिर साथी रहा है। आज जब पूरी दुनिया बदल चुकी है, तब भारत रूस को यह भरोसा दिला रहा है कि हमारे पारंपरिक रिश्ते पहले की तरह मजबूत बने हुए हैं।
एशिया में शक्ति संतुलन के लिए जरूरी- जयशंकर
भारतीय विदेश मंत्री ने आगे इस बात पर जोर दिया कि भारत का यह रुख न केवल दोनों देशों के हित में है, बल्कि यह एशिया में शक्ति संतुलन को बनाए रखने के लिए भी बेहद जरूरी है, ताकि रूस के पास एशिया में अन्य मजबूत विकल्प भी उपलब्ध रहें।
चीन को लेकर क्या बोले जयशंकर
इसी दौरान जयशंकर ने भारत और चीन के संबंध पर भी खुलकर बातचीत की। उन्होंने दो टूक कहा कि दोनों देशों के बीच कोई निर्धारित सीमा नहीं है और यह विवाद दशकों पुराना है।
जयशंकर ने इस बात पर जोर दिया कि 1975 से 2020 तक सीमा पर एक भी गोली नहीं चली और खून नहीं बहा, लेकिन 2020 की कोरोना महामारी के दौरान हुई झड़पों ने इस स्थिति को पूरी तरह बदल दिया। उन्होंने कहा कि भारत ने चीन को साफ कर दिया है कि यदि दोनों देशों के बीच व्यापार और बाकी रिश्ते सामान्य होने हैं, तो सीमा पर शांति और स्थिरता बनाए रखना सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है।
