विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

BRICS समिट में अमेरिका पर भड़के रूस और ईरान, मेजबान भारत के लिए क्या होंगी चुनौतियां

Published: Sat, 12 Sep 2026 10:42 AM (GMT+05:30)

रूस और ईरान ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में अमेरिका और पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों की कड़ी आलोचना की ...और पढ़ें

ब्रिक्स समिट में पीएम मोदी के साथ ईरान और रूस के राष्ट्रपति।

ब्रिक्स समिट में पीएम मोदी के साथ ईरान और रूस के राष्ट्रपति।

HighLights

  1. रूस और ईरान ने ब्रिक्स में अमेरिका के प्रतिबंधों की आलोचना की।

  2. उन्होंने ब्रिक्स से चुनौतियों से निपटने की रणनीति बनाने को कहा।

  3. भारत के लिए यह बैठक पश्चिमी-विरोधी न बने, बड़ी चुनौती।

डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। रूस और ईरान ने शुक्रवार को अमेरिका और अन्य पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए प्रतिबंधों और आक्रामक कार्रवाइयों की आलोचना की। उन्होंने ब्रिक्स से ऐसी रणनीतियां बनाने को कहा जिनसे यह समूह चुनौतियों और दबावों का बेहतर ढंग से सामना कर सके। ऐसे में भारत के सामने यह सुनिश्चित करना कि यह बैठक पश्चिमी-विरोधी मंच न बन जाए, किसी चुनौती से कम नहीं है।

ब्रिक्स बिजनेस फोरम में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा, "पिछले कुछ सालों में ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं लेकिन हाल के महीनों में ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजरायल की सैन्य आक्रामकता की वजह से यह दबाव और भी खतरनाक दौर में पहुंच गया है। इससे न सिर्फ भौतिक नुकसान हुआ बल्कि एक अहम सच्चाई भी सामने आई कि आर्थिक सुरक्षा को राष्ट्रीय और क्षेत्रीय सुरक्षा से अलग नहीं किया जा सकता।"

ईरान और रूस ने क्या कहा?

उन्होंने कहा, "जब भी किसी देश का व्यापार, ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर या वित्तीय सिस्टम राजनीतिक या सैन्य दबाव में आता है तो इसका असर देश की सीमाओं से बाहर तक फैलता है और इससे क्षेत्रीय या वैश्विक स्थिरता भी प्रभावित हो सकती है।"

वहीं, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने उन नेताओं की आलोचना की जो अपना पुराना दबदबा वापस पाने के लिए हर संभव तरीका अपना रहे हैं।

उन्होंने कहा, "वे सीधे तौर पर शारीरिक बल का इस्तेमाल करने तक चले जाते हैं। इसमें औद्योगिक और लॉजिस्टिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को नष्ट करना भी शामिल है। इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर को रोकने और समुद्री जहाजों पर कब्जा करने की कोशिशें हो रही हैं। साथ ही जो लोग दूसरों के हितों के बजाय अपने राष्ट्रीय हितों की रक्षा करना चाहते हैं उन पर तथाकथित दूसरे दर्जे के प्रतिबंध की धमकी के साथ गैर-कानूनी प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं।"

भारत के सामने बड़ी चुनौती

इन भाषणों से भारत के सामने आने वाली चुनौतियों की एक झलक मिली। भारत को दुश्मनी और अपनी फ्लेक्सिबल मल्टी-अलाइनमेंट (कई देशों के साथ लचीले संबंध रखने) की नीति के बीच संतुलन बनाना होगा।

भारत को पता है कि ट्रंप प्रशासन ब्रिक्स की बातचीत पर कड़ी नज़र रखेगा, क्योंकि रूस और ईरान प्रतिबंधों से नाराज हैं और चीन डी-डॉलरलाइजेशन और क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट सिस्टम जैसे कदमों को आगे बढ़ाने में दिलचस्पी ले रहा है, जो पश्चिम के कंट्रोल वाले SWIFT को टक्कर दे सकते हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप ने ब्रिक्स के प्रति अपने विरोध को कभी नहीं छिपाया है।

रूस और ईरान ने क्या मांग की?

पुतिन ने व्यापार, इंफ्रास्ट्रक्चर और टेक्नोलॉजी के प्रोजेक्ट्स के लिए इन्वेस्टमेंट प्लेटफॉर्म की मांग की। उन्होंने कहा, "हम अपने सहयोगियों के साथ मिलकर दुनिया की एनर्जी और फूड सिक्योरिटी में योगदान देने और भरोसेमंद ग्लोबल रूट, जैसे ट्रांस-आर्कटिक ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर और नॉर्थ-साउथ इंटरनेशनल कॉरिडोर को मिलकर आकार देने के लिए तैयार हैं।"

पेजेशकियन ने कहा, "खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा, आर्थिक सुरक्षा के दो मुख्य आधार हैं। ईरान अपने विशाल ऊर्जा भंडार और बेहतरीन भौगोलिक स्थिति के कारण ब्रिक्स (BRICS) की खाद्य, ऊर्जा और परिवहन सप्लाई चेन में एक रणनीतिक साझेदार की भूमिका निभाने के लिए तैयार है।"

उन्होंने स्थानीय मुद्रा में व्यापार बढ़ाने, 10 अरब डॉलर की शुरुआती राशि के साथ एक री-इंश्योरेंस पूल बनाने और न्यू डेवलपमेंट बैंक के जरिए इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए फंडिंग करने की वकालत की। पुतिन ने भी एनडीबी का समर्थन किया और निवेश का एक नया प्लेटफॉर्म बनाने के लिए इसका इस्तेमाल करने पर जोर दिया।

यह भी पढ़ें: आतंकवाद से निपटने का संकल्प, UNSC में भारत की स्थायी सदस्यता... BRICS समिट में होंगे 50 ऐतिहासिक समझौते