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हम नए और सही नजरिए से बताएंगे भारत और रूस की कहानीः सिमोन्यान

Published: Mon, 14 Sep 2026 06:23 PM (IST)Updated: Mon, 14 Sep 2026 06:25 PM (IST)

रशिया टुडे (आरटी) ने हिंदी में अपना चैनल लॉन्च किया है, जिसका उद्देश्य भारत की खबरों को सही परिप्रेक्ष्य में दुनिया के सामने लाना है।

नए और सही नजरिए से बताएंगे भारत और रूस की कहानी।

नए और सही नजरिए से बताएंगे भारत और रूस की कहानी।

HighLights

  1. आरटी ने भारत के लिए हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म लॉन्च किया।

  2. भारत-रूस संबंध ऐतिहासिक रूप से मजबूत और व्यावहारिक हैं।

  3. आरटी का लक्ष्य वैकल्पिक दृष्टिकोण से वैश्विक खबरें प्रस्तुत करना।

जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विश्व के कई देशों और लगभग एक दर्जन भाषाओं में चल रहे रशिया टुडे (आरटी) ने अब हिंदी में भी अपना चैनल लॉन्च कर दिया है। आरटी की एडिटर इन चीफ मार्गरीटा सिमोन्यान ने दैनिक जागरण को बताया कि उनका चैनल सही परिप्रेक्ष्य में दुनिया को भारत की खबरें देगा। वही भारत जो इस वक्त आत्मविश्वास से भरा है।

ईमेल के जरिए हुए साक्षात्कार का अंश -

1. पिछले दो दशक में, रूस में एक बहुत बड़ा और गहरा बदलाव आया है। आपके हिसाब से देखें तो क्या आज भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आज भी रूस के बारे में बुनियादी रूप से गलत समझा जाता है?

सोवियत संघ के विघटन के बाद का एक दशक एक तरह की भटकाव वाली अवधि थी। उस दौरान हमने खुद को यह मानने दिया कि पश्चिमी देश हमसे बेहतर जानते हैं, और उदारवादी लोकतंत्र ही वह मॉडल है, जिसे हर किसी को अपनाना चाहिए।

वहीं पश्चिमी देशों ने शीत युद्ध खत्म होने के बाद भी रूस को लेकर अपनी सोच में रत्ती भर बदलाव नहीं किया था। अब हम अपनी पहचान, संप्रभुता और प्राथमिकताओं को लेकर बहुत अधिक सतर्क और सजग हैं।

2. टैरिफ, पाबंदियों, प्रतिस्पर्धी गुटों और बदलती सप्लाई चेन से नई शक्ल ले रही दुनिया में क्या आपको लगता है कि दोनों देश इस ऐतिहासिक गर्मजोशी को उसी मजबूती के साथ आगे बढ़ा सकते हैं?

टैरिफ और पाबंदियां असल में शक्ति संतुलन के बदलते स्वरूप, और अपने फैसले खुद लेने वाले व अपनी संप्रभुता को मजबूत करने वाले देशों के प्रति एक प्रतिक्रिया मात्र हैं। यह प्रतिक्रिया इस बदलाव को सार्थक रूप से धीमा नहीं कर सकती। भारत तो एक तरह से इस बदलाव के बिल्कुल केंद्र में है।

ईमानदारी से कहें तो आज के दौर में भारत दुनिया की सबसे दिलचस्प और महत्वपूर्ण जगहों में से एक है। रूस भी इस बदलाव को आगे बढ़ाने वाले प्रमुख देशों में से है। यह दोनों देशों की एक ही दिशा में समान सोच का मजबूत आधार है।

भारत और रूस के संबंध कई मायनों में अनूठे हैं। ये खास हैं क्योंकि यह पूरी तरह व्यावहारिक होने के साथ-साथ किसी तरह के आदान-प्रदान की शर्त पर नहीं टिके हैं। न तो मॉस्को और न ही दिल्ली, अन्य जगहों पर एक-दूसरे के आचरण के आधार पर इस रिश्ते को तय करते हैं।

भारत क्वाड का सदस्य है और इसकी वजह से रूस ने कभी उससे दूरी नहीं बनाई। इसी तरह रूस के चीन से संबंधों के कारण भारत कभी पीछे नहीं हटा। इसमें कोई गेम नहीं है। फिर भी इस रिश्ते के केंद्र में ऊर्जा, रक्षा और व्यापार जैसे बहुत ही ठोस हित मौजूद हैं।

3. रक्षा और ऊर्जा परंपरागत रूप से भारत-रूस सहयोग के सबसे मजबूत स्तंभ रहे हैं। आगे के दौर में इस रिश्ते को कौन-सी बात परिभाषित करेगी?

भविष्य की ओर देखते हुए कई महत्वपूर्ण क्षेत्र हैं। लेकिन हमारे दोनों देशों के सामने आने वाली नई प्रमुख चुनौतियों में से एक क्षेत्र होगा- आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस। एआइ पहले से ही जीवन के सभी क्षेत्रों में हमारे बुनियादी ढांचे का हिस्सा बन रहा है। आगे भी यह उन सभी क्षेत्रों में तेजी से एकीकृत होता रहेगा, जहां हमारे देशों के बीच दशकों पुराना सहयोग रहा है।

लेकिन मैं एक और बात पर जोर देना चाहती हूं कि सिर्फ इंडस्ट्री ही नहीं, बल्कि लोग हैं जो हमारे दोनों देशों के बीच इस ऐतिहासिक गर्मजोशी को आगे बढ़ाते हैं। वे हमेशा से हमारे बीच सहयोग का सबसे मजबूत आधार रहे हैं, और मुझे लगता है कि वे भविष्य में भी ऐसे ही बने रहेंगे।

पिछले साल दिसंबर में जब हमने दिल्ली में 'आरटी इंडिया' लॉन्च किया था, तब राष्ट्रपति पुतिन ने अपने भाषण में राज कपूर का जिक्र किया था, और कुछ ही घंटों में वह इंटरनेट पर वायरल हो गया था। हमें उम्मीद है कि भारत के लिए एक समर्पित चैनल के बाद अब हिंदी डिजिटल प्लेटफॉर्म शुरू करने से संबंधों को और मजबूती मिलेगी।

4. अंतरराष्ट्रीय समाचारों में पश्चिमी मीडिया के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए 2005 में आरटी की शुरुआत की गई थी। इस दौरान आरटी का मिशन किस तरह विकसित हुआ है, आरटी नेटवर्क की वैश्विक रणनीति में भारत की क्या जगह है?

हमारी रणनीति बहुत सरल है: बहुध्रुवीय विश्व की पूरी कहानी और सच्चाई एकपक्षीय मीडिया नहीं बता सकता। अभी हाल में नॉर्वे के सम्राट का निधन हुआ। मैंने देखा कि बीबीसी ने अपने वैश्विक दर्शकों को घंटों तक लगातार उसकी कवरेज दिखाई। मैं पूरे सम्मान के साथ कहती हूं कि मुझे नहीं लगता कि यूरोप के बाहर के किसी व्यक्ति को इतना सबकुछ बैठकर देखने की जरूरत
थी।

हमने पहलगाम हमले के दौरान भी यही देखा। वहां इतना सब होने के बाद भी, कुछ पश्चिमी मीडिया संस्थानों ने उसे केवल 'गोलीबारी' और 'संदिग्ध उग्रवादियों' की हरकत की तरह दिखाया। आरटी भारत में जो कर रहा है, वह नजरिए में फर्क का एक अच्छा उदाहरण है।

हमने स्थानीय पत्रकारों की एक बड़ी टीम बनाई है, जो हमारी सोच को साझा करते हैं और दुनिया को अपनी कहानियां बताने के लिए उत्सुक हैं। केवल चुनौतियों के बारे में ही नहीं, बल्कि भारत और भारतीयों की कामयाबी, बदलाव और कुछ नया करने के जज्बे की कहानियां बताना चाहते हैं।

5. अब चूंकि आरटी हिंदी में भी आ गया है, तो ऐसी कौन-सी एक बात है जो आज के रूस के बारे में आप भारत की नई पीढ़ी को समझाना चाहेंगी?

रूस भारत का एक पुराना मित्र देश है। वह एक ऐसा देश है, जिसने कभी किसी को अपना गुलाम नहीं बनाया, जो आपकी संप्रभुता का सम्मान करता है और एक बहुध्रुवीय दुनिया के निर्माण में आपको एक बराबर का साझेदार मानता है।

आरटी को इस बात पर गर्व है कि वह 100 देशों में अपने 95 करोड़ से ज्यादा दर्शकों तक ऐसी कहानियां एक अलग नजरिए के साथ पहुंचाता है, जिन्हें अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है।

हमारा चैनल नए बदलते भारत को दुनिया के सामने पेश करता है। हम खबरों और यहां होने वाले घटनाक्रमों को ठीक उसी तरह दिखाते हैं, जैसा कि भारत इस वक्त है: आत्मविश्वास से भरा हुआ, महत्वाकांक्षी और तकनीक के दम पर आगे बढ़ता हुआ।

आरटी रूस से जुड़ी खबरों और रूस-भारत साझेदारी से संबंधित मुद्दों को भी सामने लेकर आएगा। हमारा मानना है कि भारत की नई पीढ़ी आज के रूस को केवल पुरानी यादों के चश्मे के बजाय, उसी रूप में देखने-समझने में दिलचस्पी रखती है, जैसा कि वह आज है। इनमें कई ऐसे युवा भी हैं, जो पढ़ाई या रोजगार के लिए रूस जाना चाहते हैं।

हमेशा की तरह, हमें अपने पाठकों पर विश्वास है कि वह हमारे नजरिए को भी देखेंगे, समझेंगे और खुद अपनी राय बनाएंगे। आरटी का नया प्रचार कैंपेन भी यही कहता है- फर्क नजरिए का है।